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Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष की दशमी तिथि आज, इस समय करें श्राद्ध-तर्पण; जानें कुतुप और रौहिण मुहूर्त

पितृ पक्ष 2026 में आज 5 अक्टूबर को दशमी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 5 अक्टूबर को सुबह 3:53 बजे शुरू हुई। श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। जानें दशमी श्राद्ध, तर्पण और जरूरी नियम।

 
पितृ पक्ष की दशमी तिथि आज
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Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। आज 5 अक्टूबर को पितृ पक्ष की दशमी तिथि का श्राद्ध किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त को विशेष माना गया है। आइए जानते हैं दशमी तिथि का मुहूर्त और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आज कितने बजे तक रहेगा कुतुप मुहूर्त?

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि 5 अक्टूबर को तड़के 3 बजकर 53 मिनट से शुरू हुई और 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।

दशमी तिथि पर श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त को शुभ माना जाता है।

दशमी तिथि पर किसका श्राद्ध किया जाता है?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, जिस व्यक्ति की मृत्यु किसी पक्ष की दशमी तिथि को हुई हो, उसका श्राद्ध दशमी तिथि पर किया जाता है। यह नियम शुक्ल और कृष्ण, दोनों पक्षों की दशमी तिथि के लिए माना जाता है।

दशमी श्राद्ध को कुछ स्थानों पर दसमी श्राद्ध भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की तृप्ति होती है।

शास्त्रीय परंपरा में सामान्यतः पितर का श्राद्ध उसी तिथि पर करने की बात कही गई है, जिस तिथि को उनका निधन हुआ था। वहीं, यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि की जानकारी नहीं है तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध किया जाता है।

श्राद्ध के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

श्राद्ध कर्म से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • श्राद्ध का भोजन सात्विक और स्वच्छ तरीके से तैयार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसमें लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
  • श्राद्ध का भोजन तैयार होने के बाद पंचबलि निकालने की परंपरा है। इसमें गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी और देवताओं के लिए भोग निकाला जाता है।
  • श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा देने की परंपरा है।
  • तर्पण करते समय दिशा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के तर्पण के दौरान दक्षिण दिशा की ओर मुख किया जाता है।


धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है जानकारी

पितृ पक्ष, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से जुड़ी मान्यताएं हिंदू धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं। इनके संबंध में अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में विधि-विधान में अंतर भी हो सकता है। यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग संबंधी विवरण पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक तथ्य या प्रमाण के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।