Ramadan 2026: आज से शुरू हो गया इबादत का पाक महीना, भारत में दिखा रमजान का चांद, कल से पहला रोजा
भारत में रमजान का चांद नजर आ गया है। सबसे पहले बिहार और असम से चांद देखे जाने की खबर सामने आई। इसके बाद कई राज्यों से भी चांद की तस्दीक हुई। लिहाजा गुरुवार को पहला रोजा रखा जाएगा। Imarat-e-Sharia, फुलवारी शरीफ (पटना) के काज़ी रिजवान नदवी ने जानकारी दी कि विभिन्न इलाकों से चांद देखे जाने की सूचना मिली है, जिसकी पुष्टि की जा रही है।
लखनऊ में Maulana Khalid Rasheed Firangi Mahli ने भी रमजान के चांद की तस्दीक की। वहीं जयपुर सहित राजस्थान के कई हिस्सों में बादलों के बावजूद लोगों की गवाही के आधार पर चांद दिखने की पुष्टि हुई। उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में भी चांद देखे जाने की खबर है।
चांद नजर आने के साथ ही लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। आज से मस्जिदों में तरावीह की विशेष नमाज की शुरुआत हो गई है।
चांद के आधार पर तय होती है तारीख
इस्लाम में महीनों की गणना चांद के घटने-बढ़ने के आधार पर की जाती है। इसी वजह से रमजान हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अलग-अलग तारीखों में आता है। जिस दिन चांद नजर आता है, उसके अगले दिन से रोजा शुरू होता है।
रमजान में कैसे की जाती है इबादत?
रमजान के महीने में रोजेदार पांच वक्त की नमाज के साथ तरावीह की नमाज भी अदा करते हैं। रोजेदार सहरी और इफ्तार अपने परिवार व समुदाय के साथ करते हैं।
30 दिनों के रोजों के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को Eid al-Fitr मनाई जाती है। इसे ईद-उल-फितर या मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और खुशियां मनाते हैं।
क्या हैं सहरी और इफ्तार?
सहरी (सेहरी): फज्र की अजान से पहले किया जाने वाला भोजन, जिससे रोजा शुरू किया जाता है।
इफ्तार: सूर्यास्त के बाद रोजा खोलने के लिए किया जाने वाला भोजन।
कब शुरू हुई रोजा रखने की परंपरा?
रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। रोजा रखने की परंपरा 622 ईस्वी में मदीना में शुरू हुई मानी जाती है। अरबी भाषा में ‘रमजान’ का अर्थ भीषण गर्मी से जुड़ा माना जाता है।
यह महीना आत्म-संयम, इबादत, दान और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, जिसमें मुसलमान रोजा रखकर खुदा की बंदगी करते हैं और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष ध्यान देते हैं।
