Movie prime

Shardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, 48 मिनट में होगी कलश स्थापना, 19 को अष्टमी-नवमी

Shardiya Navratri 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस बार कलश स्थापना के लिए 48 मिनट का विशेष मुहूर्त बताया गया है। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी के साथ संधि पूजा होगी। विजयादशमी 20 अक्टूबर और वाराणसी का प्रसिद्ध नाटी इमली भरत मिलाप 22 अक्टूबर को होगा।

 
Shardiya Navratri 2026
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

Shardiya Navratri 2026 : पितृपक्ष की समाप्ति के बाद शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे। इस बार नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के लिए सिर्फ 48 मिनट का विशेष मुहूर्त बताया गया है। वहीं महाअष्टमी और महानवमी का संयोग भी खास रहेगा, क्योंकि दोनों तिथियां 19 अक्टूबर को ही पड़ेंगी। विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

नवरात्र को लेकर इस बार माता के आगमन और प्रस्थान को लेकर भी ज्योतिषीय मान्यताओं में चर्चा है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर और प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे पर होगा।

11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र

पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्र अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होंगे। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी।

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के लिए इस बार सीमित समय बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त में 48 मिनट के दौरान कलश स्थापना की जाएगी। अभिजीत मुहूर्त को धार्मिक परंपरा में भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़े शुभ समय के रूप में भी माना जाता है।

चार साल बाद नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के एक साथ रहने की बात कही जा रही है। इनका प्रभाव पूरे दिन रहने का उल्लेख किया गया है।

हाथी पर मां दुर्गा का आगमन, मुर्गे पर प्रस्थान

धार्मिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में देवी के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों का विशेष महत्व माना जाता है।

प्रो. नागेंद्र पांडेय के मुताबिक, इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी। मान्यता के अनुसार हाथी पर देवी का आगमन वर्षा, उन्नति और मंगल का संकेत माना जाता है।

वहीं नवरात्र की समाप्ति पर 20 अक्टूबर को माता का प्रस्थान चरणायुध यानी मुर्गे पर होगा। धार्मिक मान्यताओं में इसे देश और राष्ट्र के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। हालांकि, यह ज्योतिषीय मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं।

19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी

इस बार नवरात्र में महाअष्टमी और महानवमी का विशेष संयोग 19 अक्टूबर, सोमवार को बनेगा। इसी दिन संधि पूजा का भी विशेष समय रहेगा।

संधि पूजा अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट के संधिकाल में की जाती है। इस तरह कुल 48 मिनट का यह समय धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है।

संधि पूजा का समय

संधि पूजा: 19 अक्टूबर 2026, सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी संधिकाल में देवी दुर्गा ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध करने के लिए चामुंडा स्वरूप धारण किया था। इसी वजह से नवरात्र में संधि पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

संधि पूजा में 108 दीप और कमल चढ़ाने की परंपरा

संधि पूजा के दौरान धार्मिक परंपरा के अनुसार 108 दीपक जलाने और 108 कमल के फूल अर्पित करने का विधान बताया गया है। कमल उपलब्ध न होने पर लाल फूल चढ़ाने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

कुछ परंपराओं में विशेष बलि का विधान मिलता है, जबकि सात्विक पूजा पद्धति में नैवेद्य अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु अपनी स्थानीय परंपरा और पूजा-पद्धति के अनुसार अनुष्ठान करते हैं।

20 अक्टूबर को विजयादशमी, 22 को भरत मिलाप

शारदीय नवरात्र इस बार 11 से 20 अक्टूबर तक चलेंगे। नवरात्र के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसके बाद वाराणसी की प्रसिद्ध रामलीला परंपरा का प्रमुख आयोजन नाटी इमली का भरत मिलाप 22 अक्टूबर को होगा। काशी में भरत मिलाप की लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक जुटते हैं।

इस तरह 2026 का शारदीय नवरात्र धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ अष्टमी-नवमी के एक ही दिन पड़ने और विजयादशमी के बाद काशी के प्रसिद्ध भरत मिलाप आयोजन को लेकर भी खास रहेगा।