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नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें? जानें कलश, जौ, नारियल और शंख रखने के नियम

शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। जानिए कलश स्थापना की सही विधि, शुभ दिशा, कलश में जल और सिक्का डालने का नियम, नारियल व शंख रखने का तरीका और क्या कलश के ऊपर दीपक जलाना उचित है। पढ़ें नवार्ण मंत्र और घटस्थापना से जुड़े जरूरी नियम।

 
नवरात्रि
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शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ कलश स्थापना या घटस्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के दौरान दिशा, कलश में जल भरने, जौ बोने और नारियल रखने जैसी बातों का विशेष ध्यान रखा जाता है। आचार्य इंदु प्रकाश के बताए गए नियमों के अनुसार, जानिए कलश स्थापना की सही विधि क्या है और कलश के ऊपर दीपक जलाना उचित है या नहीं।

कलश स्थापना के लिए कौन-सी दिशा है शुभ?

कलश स्थापना के लिए घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को उपयुक्त माना जाता है। सबसे पहले इस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें और वहां जल छिड़कें। इसके बाद साफ मिट्टी या बालू की एक परत बिछाएं। उस पर जौ डालें और फिर मिट्टी या बालू की दूसरी परत बिछाकर हल्का जल छिड़क दें।

धार्मिक परंपरा में नवरात्र के दौरान जौ बोने को शुभ माना जाता है। पूजा के दिनों में जौ के अंकुरों को देखकर भी श्रद्धालु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ-अशुभ संकेतों की व्याख्या करते हैं।

कलश में जल भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

जौ और मिट्टी की परत तैयार करने के बाद उसके ऊपर साफ मिट्टी या धातु का कलश स्थापित करें। कलश को स्वच्छ जल से भरें और उसमें एक सिक्का डालें। यदि उपलब्ध हो तो जल में गंगाजल या अन्य पवित्र नदियों के जल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं।

इसके बाद कलश के मुख पर दाहिना हाथ रखकर पवित्र नदियों का आह्वान करने वाला मंत्र पढ़ें—

“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥”

इस मंत्र के माध्यम से गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों का स्मरण किया जाता है। यदि मंत्र याद न हो, तो श्रद्धापूर्वक इन नदियों का ध्यान कर सकते हैं। इसके बाद कलश में वरुण देव का आह्वान करने की परंपरा है।

कलश के ऊपर नारियल कैसे रखें?

कलश स्थापना के अगले चरण में उसके मुख पर कलावा बांधें और ऊपर मिट्टी की कटोरी रखें। कटोरी में जौ भरें। जौ उपलब्ध न होने पर चावल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

अब जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलावे से बांधें और उसे कटोरी के ऊपर स्थापित करें। इस दौरान नारियल को सावधानी से रखें, ताकि वह स्थिर रहे और पूजा की सामग्री बिखरे नहीं।

क्या कलश के ऊपर दीपक जलाना चाहिए?

कलश स्थापना के दौरान एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या कलश के ऊपर रखी कटोरी में घी का दीपक जलाया जा सकता है? आचार्य इंदु प्रकाश के बताए गए नियमों के अनुसार, कलश के ऊपर दीपक जलाना उचित नहीं माना गया है।

धार्मिक मान्यता में कलश स्थापना के लिए ईशान कोण और दीपक के लिए आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा को उपयुक्त बताया जाता है। इसलिए कलश के ऊपर दीपक रखने के बजाय पूजा स्थल पर दीपक के लिए अलग स्थान निर्धारित करना चाहिए।

कलश पर शंख रखने का क्या है नियम?

कुछ श्रद्धालु कलश के ऊपर रखी कटोरी में चावल भरकर उसके ऊपर शंख स्थापित करते हैं। बताई गई पूजा-विधि के अनुसार, ऐसा किया जा सकता है। इसमें दक्षिणावर्ती शंख रखने और उसका मुख ऊपर की ओर रखने की बात कही गई है। शंख की चोंच अपनी ओर रखने का भी उल्लेख मिलता है।

हालांकि, शंख रखने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक पूजा-पद्धति या पुरोहित के निर्देशों का भी ध्यान रखें।

कलश स्थापना में करें नवार्ण मंत्र का जाप

नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के दौरान नवार्ण मंत्र का जाप विशेष महत्व रखता है। कलश स्थापना की विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।

नवार्ण मंत्र:
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।”

मंत्र के साथ कलश स्थापना की पूरी विधि

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते समय पूजा की प्रक्रिया को इस क्रम में पूरा कर सकते हैं—

  1. स्थान की सफाई: उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा स्थल साफ करें और जल छिड़कते हुए नवार्ण मंत्र का जाप करें।
  2. मिट्टी या बालू बिछाएं: पूजा स्थल पर मिट्टी या बालू की परत बिछाकर पांच बार मंत्र का जाप करें।
  3. जौ डालें: मिट्टी के ऊपर जौ बिछाएं और मंत्र पढ़ें।
  4. दूसरी परत तैयार करें: जौ के ऊपर मिट्टी या बालू की एक और परत बिछाकर हल्का जल छिड़कें।
  5. कलश स्थापित करें: तैयार स्थान पर साफ कलश रखें और नवार्ण मंत्र का जाप करें।
  6. कलश में जल भरें: कलश में स्वच्छ जल और एक सिक्का डालें। चाहें तो गंगाजल भी मिला सकते हैं।
  7. वरुण देव का आह्वान करें: धार्मिक विधि के अनुसार वरुण देव का स्मरण करें।
  8. कलावा बांधें: कलश के मुख पर कलावा बांधें और उसके ऊपर कटोरी रखें।
  9. कटोरी में जौ या चावल भरें: कटोरी में जौ डालें। उपलब्ध न होने पर चावल रख सकते हैं।
  10. नारियल तैयार करें: जटा वाले नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलावे से बांधें।
  11. नारियल स्थापित करें: नारियल को कटोरी के ऊपर सावधानी से रखें और मंत्र का जाप करें।
  12. दीपक अलग रखें: पूजा स्थल पर दीपक को कलश के ऊपर रखने के बजाय अलग स्थान पर जलाएं।

पूरी प्रक्रिया के दौरान श्रद्धा के साथ नवार्ण मंत्र का जाप किया जा सकता है। पूजा की विधि में स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर संभव है, इसलिए जरूरत पड़ने पर पुरोहित से मार्गदर्शन लेना उचित रहेगा।

नवरात्रि में कलश स्थापना का क्या है महत्व?

हिंदू धार्मिक परंपरा में कलश को शुभता, पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की नौ दिनों तक चलने वाली आराधना की शुरुआत होती है। श्रद्धालु इन दिनों देवी के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कलश स्थापना करते समय साफ-सफाई, पूजा सामग्री और अपनी परंपरा के अनुसार विधि का ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।