नवरात्रि के छठे दिन कीजिए मां कात्यायनी के दर्शन, 40 दिन हल्दी लेपन से कन्याओं को मिलता है मन चाहा वर
शारदीय नवरात्रि 2026 के छठे दिन वाराणसी के प्राचीन मां कात्यायनी मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। जानिए मां कात्यायनी की पूजा का महत्व, 40 दिन हल्दी-दही चढ़ाने से विवाह की मनोकामना पूरी होने की मान्यता, शुभ भोग और पूजा मंत्र।
शारदीय नवरात्रि 2026: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में शारदीय नवरात्रि के छठे दिन आज शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह मंगला आरती के बाद से ही वाराणसी के पक्का महल स्थित सिद्धेश्वरी क्षेत्र और संकठा-सिंधिया घाट स्थित प्राचीन मां कात्यायनी के मंदिर में श्रद्धालु आ रहे है।
शास्त्रों के अनुसार, महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, जिसके कारण इनका नाम कात्यायनी पड़ा। सिंह पर सवार चार भुजाओं वाली योद्धा देवी मां कात्यायनी ने ही देवताओं को महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इन्हें साहस, शक्ति और निर्भयता की प्रदाता माना जाता है।
काशी के इस प्राचीन दरबार से जुड़ी एक बेहद अनूठी धार्मिक मान्यता है। मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, विवाह की इच्छा रखने वाले भक्त और विशेष रूप से कुंवारी कन्याएं यदि लगातार 40 दिनों तक माता रानी के चरणों में हल्दी और दही का लेपन करती हैं, तो मां की कृपा से उन्हें सुयोग्य जीवनसाथी और मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आज के दिन मां को शहद का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
नवरात्रि के पावन पर्व पर पक्का महल की संकरी गलियों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए वाराणसी पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सिंधिया घाट और संकठा घाट के रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई है ताकि कतारबद्ध होकर सभी श्रद्धालु सुगमता से दर्शन कर सकें।
मां कात्यायनी का मंत्र जाप
//चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मां के मंत्र का जाप करने से भक्तों को साहस, शक्ति और मानसिक संबल प्राप्त होता है।
