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सोमनाथ मंदिर में पहली बार होगा कुंभाभिषेक, क्यों माना जाता है बेहद पवित्र, समझिए इसका धार्मिक महत्व

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर पहली बार विशेष कुंभाभिषेक अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समारोह में शामिल होंगे। जानिए कुंभाभिषेक क्या होता है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और मंदिरों में इसे क्यों किया जाता है।

 
सोमनाथ मंदिर
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भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर इस बार ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सोमनाथ मंदिर पहुंचे हैं, जहां वे महापूजा, ध्वजारोहण और कई धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

इस समारोह की सबसे खास बात यह है कि सोमनाथ मंदिर में पहली बार विशेष ‘कुंभाभिषेक’ अनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। देश के 11 प्रमुख तीर्थस्थलों से लाए गए पवित्र जल से मंदिर के शिखर का अभिषेक किया जाएगा। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर कुंभाभिषेक क्या होता है और इसका धार्मिक महत्व क्यों इतना बड़ा माना जाता है।

क्या होता है कुंभाभिषेक?

कुंभाभिषेक दो शब्दों से मिलकर बना है - ‘कुंभ’ यानी पवित्र कलश और ‘अभिषेक’ यानी स्नान या जल अर्पण। इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर चढ़ाया जाता है।

हिंदू परंपरा में इसे मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति को पुनर्जीवित करने वाला विशेष धार्मिक संस्कार माना जाता है। दक्षिण भारत के मंदिरों में यह अनुष्ठान आमतौर पर 10 से 12 वर्षों के अंतराल पर किया जाता है। हालांकि सोमनाथ मंदिर में यह पहली बार आयोजित होने जा रहा है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

मंदिर की ऊर्जा को पुनः जागृत करने का अनुष्ठान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब किसी नए मंदिर का निर्माण होता है, तब ‘नूतन कुंभाभिषेकम’ किया जाता है। इसका उद्देश्य मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं में दिव्य ऊर्जा का आवाहन करना होता है। समय बीतने के साथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनः सक्रिय करने के लिए दोबारा कुंभाभिषेक कराया जाता है। माना जाता है कि इस प्रक्रिया से मंदिर का वातावरण अधिक पवित्र और ऊर्जावान बनता है।

11 तीर्थों के जल से होगा विशेष अभिषेक

सोमनाथ अमृत महोत्सव के तहत इस बार देशभर के 11 प्रमुख तीर्थस्थलों से पवित्र जल एकत्रित किया गया है। इन्हीं पवित्र जलधाराओं से मंदिर के ऊंचे शिखर का अभिषेक किया जाएगा।

वैदिक मंत्रों के बीच पुजारी मंदिर के शिखर पर जल अर्पित करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि मंदिर के शिखर पर चढ़ाया गया यह पवित्र जल ब्रह्मांडीय ऊर्जा को गर्भगृह में स्थित शिवलिंग तक पहुंचाता है, जिससे पूरे मंदिर परिसर में सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

75 वर्ष पूरे होने पर खास बना आयोजन

सोमनाथ मंदिर भारतीय आस्था, इतिहास और सनातन संस्कृति का प्रमुख प्रतीक माना जाता है। 11 मई वह ऐतिहासिक दिन है जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन हुआ था। अब इसके 75 वर्ष पूरे होने पर यह विशेष अमृत महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार सोमनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक जैसे विशेष वैदिक अनुष्ठान का आयोजन हो रहा है।