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Bhai Dooj 2025 : दुनिया का एकमात्र भाई-बहन का मंदिर, यहां बहन यमुना संग विराजते हैं यम

 
Bhai Dooj
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Yam-Yamuna Temple : भारत अपनी प्राचीन परंपराओं, आस्था और मंदिरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां ऐसे अनगिनत मंदिर हैं जो अपनी भव्यता और धार्मिक मान्यताओं के कारण लोगों के बीच विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक अद्भुत मंदिर है, जो किसी देवी या देवता को नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम को समर्पित है। यह मंदिर भगवान यमराज और उनकी बहन यमुना जी को समर्पित है, जो भगवान सूर्य के पुत्र और पुत्री माने जाते हैं। भाई दूज (Bhai Dooj 2025) के दिन इस मंदिर ेमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

यहां स्थित है भाई-बहन का यह अनोखा मंदिर

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित यह मंदिर विश्राम घाट के पास बना हुआ है और इसे श्री यमुना धर्मराज मंदिर या यम-यमुना मंदिर (Yam-Yamuna Temple) कहा जाता है। यह मंदिर भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक माना जाता है। यह मथुरा के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर के समीप स्थित है और यहां सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रहती है।

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मंदिर की विशेषता

मंदिर के गर्भगृह में काले पत्थर से बनी यमराज और मां यमुना की मूर्तियां स्थापित हैं। मां यमुना चतुर्भुज रूप में विराजमान हैं। उनके एक हाथ में भोजन की थाली, दूसरे में कमल का फूल, तीसरे हाथ में टीका लगाने की मुद्रा, और चौथा हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में है। यमराज जी को प्रसन्न और कृपालु स्वरूप में पूजा जाता है। मंदिर का प्रवेश द्वार छोटा लेकिन आकर्षक है, जिसे चांदी से सजाया गया है, जो इसकी प्राचीनता और पवित्रता का प्रतीक है।

मंदिर से जुड़ी मान्यता

इस मंदिर को लेकर एक प्रसिद्ध मान्यता है कि भैया दूज के दिन जो भाई-बहन यमुना नदी में स्नान करने के बाद इस मंदिर में दर्शन करते हैं, उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिलती है और वे दीर्घायु होते हैं।
इसी वजह से भैया दूज और रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

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यमराज और यमुना जी की पौराणिक कथा

कहानी के अनुसार, एक बार भाई दूज के अवसर पर यमुना जी ने अपने भाई यमराज को भोजन के लिए आमंत्रित किया। यमराज ने बहन का निमंत्रण स्वीकार किया और यमुना के आतिथ्य से अत्यंत प्रसन्न हुए। खुश होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। इस पर यमुना जी ने कहा,“हे भ्राता, मेरी यही इच्छा है कि जो भी भाई-बहन भाई दूज के दिन यमुना में स्नान कर मेरे और आपके दर्शन करें, उन्हें यमपुरी का भय न रहे।”

यमराज ने यह वरदान स्वीकार कर लिया। तभी से यह परंपरा चलन में आई और मथुरा का यह मंदिर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक बन गया।

यहां दर्शन का महत्व

भक्तों का मानना है कि यम-यमुना मंदिर के दर्शन करने से भाई-बहन के बीच का स्नेह और विश्वास और गहरा होता है, साथ ही आयु और सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है।