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न अर्धनारीश्वर, न पंचमुखी स्वरूप... भारत का ऐसा मंदिर, जहां एक ही प्रतिमा में होते हैं आधे गणेश-आधे हनुमान जी के दर्शन

 
Lord Adhyantha Prabhu
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आप सभी ने भगवान शिव और माता पार्वती के अर्धनारीश्वर स्वरूप के बारे में सुना और देखा है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी प्रतिमा के बारे में सुना है जिसमें भगवान गणेश और भगवान हनुमान एक ही स्वरूप में विराजमान हों? दक्षिण भारत में स्थित एक मंदिर अपनी इसी अनोखी प्रतिमा के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित मध्य कैलाश मंदिर अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं और अनूठी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। नादुक्कयिलाई के नाम से भी प्रसिद्ध इस मंदिर में स्थापित आधे गणेश और आधे हनुमान की प्रतिमा श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर देती है।

'आद्यंत प्रभु' के नाम से प्रसिद्ध है यह स्वरूप

मध्य कैलाश मंदिर में स्थापित इस विशेष प्रतिमा को आद्यंत प्रभु (Lord Adhyantha Prabhu) के नाम से जाना जाता है। इस मूर्ति में दाहिनी ओर भगवान गणेश और बाईं ओर भगवान हनुमान का स्वरूप दिखाई देता है। दोनों देवताओं के इस अद्वितीय संगम को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस प्रतिमा का कुंभाभिषेक वर्ष 1994 में संपन्न हुआ था। तभी से यह मंदिर भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

कैसे हुई इस अनोखी प्रतिमा की स्थापना?

मंदिर से जुड़े पुजारियों के अनुसार, मंदिर के एक अधिकारी को भगवान के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन हुए थे। इसके बाद उसी अनुभूति के आधार पर आद्यंत प्रभु की प्रतिमा का निर्माण कराया गया।

प्रतिदिन यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आरती के दौरान कपूर जलाया जाता है और दोपहर में मूर्ति का विधिवत स्नान कराया जाता है। इसके बाद पुजारी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं।

क्या है 'आद्यंत प्रभु' नाम का अर्थ?

"आद्यंत" शब्द का अर्थ है—जिसका न कोई आदि (आरंभ) हो और न कोई अंत। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान को चिरंजीवी माना गया है, जबकि भगवान गणेश को भी सनातन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण दोनों देवताओं के संयुक्त स्वरूप को अनंत और शाश्वत शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

कई श्रद्धालु इस स्वरूप को भगवान रुद्र की दिव्य ऊर्जा से भी जोड़कर देखते हैं।

अन्य देवी-देवताओं के भी हैं मंदिर

मध्य कैलाश मंदिर केवल आद्यंत प्रभु की प्रतिमा के लिए ही नहीं, बल्कि यहां स्थापित अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में वेंकट आनंद विनायकर, भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान सूर्य के भी भव्य मंदिर स्थित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

आस्था, वास्तुकला और अद्भुत धार्मिक मान्यताओं का संगम यह मंदिर भारतीय संस्कृति की विविधता और आध्यात्मिक समृद्धि का अनोखा उदाहरण माना जाता है।