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Ram Navami 2026 : काशी का अनोखा बैंक! जहां अकाउंट में पैसे नहीं ,जमा होता है 'राम नाम'

 
Ram Navami 2026
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वाराणसी। रामनवमी (Ram Navami 2026) के पावन अवसर पर जहां पूरे देश में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की धूम है, वहीं बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में एक ऐसा अनोखा “बैंक” है, जो अपनी कार्यप्रणाली के कारण लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस बैंक में न तो नकद जमा होता है और न ही रुपये का लेन-देन होता है, बल्कि यहां जमा होती है 'राम नाम' की पूंजी। देश-विदेश से लोग यहां राम का नाम जमा करने आते है। आइए जानते है वाराणसी में कहां स्थित है ये मंदिर।

कहां स्थित है यह अनोखा बैंक

यह खास बैंक वाराणसी के दशाश्वमेध क्षेत्र स्थित विश्वनाथ गली, त्रिपुरा भैरवी में मौजूद है, जिसे राम रमापति बैंक (Ram Ramapati Bank) के नाम से जाना जाता है। यहां आने वाले लोग ग्राहक नहीं, बल्कि भक्त होते हैं, जो भगवान राम के नाम का संचय कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।

Ram Navami 2026

 राम नाम का संचय करने से पूर्ण होती है मनोकामना

इस अनोखे बैंक की स्थापना वर्ष 1927 में की गई थी। शुरुआत में यहां केवल दो खातेदार थे, लेकिन आज देश-विदेश से लाखों लोग इससे जुड़ चुके हैं। भक्तों का मानना है कि यहां राम नाम का संचय करने से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

कैसे मिलता है ‘राम नाम का कर्ज’

इस बैंक की सबसे खास बात है यहां मिलने वाला “राम नाम का कर्ज”। कोई भी व्यक्ति दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच यहां आकर यह कर्ज ले सकता है। कर्ज के रूप में भक्तों को एक निर्धारित अवधि करीब 8 महीने 10 दिन में सवा लाख बार “राम” नाम लिखकर उसे चुकाना होता है।

इसके लिए बैंक की ओर से कागज, स्याही और अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों और अनुशासन के साथ होती है।

Ram Navami 2026

सख्त नियमों का पालन जरूरी

राम नाम का कर्ज लेने वाले भक्तों के लिए कुछ सख्त नियम भी हैं। इस दौरान उन्हें पूर्ण शुद्धता बनाए रखनी होती है और प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा जैसे तामसी भोजन से दूर रहना अनिवार्य होता है। एक व्यक्ति को अधिकतम चार बार ही यहां से कर्ज लेने की अनुमति दी जाती है।

दीन-दुखियों की सेवा का उद्देश्य

इस बैंक की स्थापना दीन-दुखियों की सेवा के उद्देश्य से की गई थी। संस्थापक परंपरा के अनुसार, यह कार्य संत परंपरा से जुड़े महात्माओं द्वारा शुरू किया गया था, ताकि लोग भक्ति के माध्यम से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त कर सकें।

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19 अरब से ज्यादा राम नाम का संग्रह

आज इस बैंक में 19 अरब 1 करोड़ से अधिक बार “राम नाम” लिखा जा चुका है। हर साल रामनवमी के अवसर पर यहां विशेष उत्सव मनाया जाता है, जिसमें लाखों भक्तों द्वारा लिखे गए राम नामों का प्रदर्शन किया जाता है।

क्या है मान्यता

मान्यता है कि राम नाम की एक परिक्रमा से ही भगवान गणेश को प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला था। ऐसे में यहां जमा अरबों राम नामों की परिक्रमा से मिलने वाले पुण्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि हर साल रामनवमी पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।


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