अमरनाथ का रहस्य: कैसे बनता है बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग, इस साल क्यों तेजी से पिघल रहा? वैज्ञानिक भी हैरान!
श्रीनगर: 3 जुलाई से शुरू हुई पवित्र अमरनाथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। यात्रा के पहले चार दिनों में ही 86 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं, जहां प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन करते हैं।
हालांकि, हर वर्ष एक सवाल लोगों के मन में जरूर उठता है कि प्राकृतिक रूप से बनने वाला बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग यात्रा के दौरान धीरे-धीरे छोटा क्यों हो जाता है और कई बार पूरी तरह विलुप्त भी क्यों हो जाता है।
क्या है शिवलिंग के पिघलने का वैज्ञानिक कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार, पवित्र गुफा में बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के शरीर से निकलने वाली गर्मी और शिवलिंग के चारों ओर लगी लोहे की रेलिंग इसकी प्रमुख वजह मानी जाती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, एक व्यक्ति के शरीर से औसतन करीब 100 वाट ऊर्जा निकलती है। जब हजारों श्रद्धालु गुफा में प्रवेश करते हैं तो उनके शरीर की गर्मी और रेलिंग को लगातार छूने से उत्पन्न ऊष्मा लोहे की छड़ों के जरिए आसपास के वातावरण और बर्फ तक पहुंचती है।
चूंकि हिम शिवलिंग शून्य डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर बना रहता है, इसलिए बाहरी गर्मी के संपर्क में आने पर वह धीरे-धीरे पिघलने लगता है। लोहे की रेलिंग गर्मी का बेहतर संवाहक होने के कारण इस प्रक्रिया को और तेज कर देती है।
पहले भी कई बार जल्दी विलुप्त हुआ शिवलिंग
अमरनाथ यात्रा के इतिहास में कई बार हिम शिवलिंग समय से पहले छोटा या पूरी तरह विलुप्त हो चुका है।
- 2004: यात्रा शुरू होने के लगभग 15 दिन बाद शिवलिंग विलुप्त हो गया।
- 2006: यात्रा शुरू होने से पहले ही हिम शिवलिंग समाप्त हो गया था।
- 2013: करीब 22 दिनों में शिवलिंग पूरी तरह पिघल गया।
- 2016: मात्र 13 दिनों में हिम शिवलिंग विलुप्त हो गया।
कैसे बनता है प्राकृतिक हिम शिवलिंग?
अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया से बनता है। गुफा की छत से लगातार टपकने वाली पानी की बूंदें अत्यधिक ठंड के कारण नीचे गिरते ही जम जाती हैं। समय के साथ इन जमी हुई परतों के एक-दूसरे पर चढ़ने से विशाल हिम शिवलिंग का निर्माण होता है।
इस वर्ष प्रथम पूजा के समय हिम शिवलिंग की ऊंचाई 5 फीट से अधिक दर्ज की गई थी।
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता और बढ़ता है। श्रावण पूर्णिमा के समय यह अपने सबसे बड़े स्वरूप में दिखाई देता है, जबकि अमावस्या तक इसका आकार धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।
वैज्ञानिकों के लिए भी बना हुआ है रहस्य
हिम शिवलिंग का निर्माण आज भी वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बना हुआ है। सामान्यतः बर्फ जमने के लिए तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या उससे कम होना चाहिए, लेकिन कई बार गुफा के आसपास का तापमान शून्य से ऊपर होने के बावजूद प्राकृतिक हिम शिवलिंग का बनना वैज्ञानिकों के लिए भी एक रहस्य बना हुआ है।
