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शारदीय नवरात्र 2026: 47 मिनट का है घट स्थापना मुहूर्त, महाअष्टमी और महानवमी की तारीखें जानें

वाराणसी में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगे। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक रहेगा। जानिए महाअष्टमी, महानवमी, महानिशा पूजन, हवन, व्रत पारण और देवी प्रतिमा विसर्जन की तारीखें और नवरात्र से जुड़ी जरूरी जानकारी।
 
शारदीय नवरात्र 2026
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वाराणसी। काशी में शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में घरों और मंदिरों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। नवरात्र के पहले दिन घरों में कलश स्थापना होगी। बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के अनुसार, घट स्थापना के लिए सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक का समय शुभ है। यानी श्रद्धालुओं को कलश स्थापना के लिए कुल 47 मिनट का मुहूर्त मिलेगा।

काशी में नवरात्र के दौरान देवी आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। इस बार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रविवार को नवरात्र का पहला दिन माना जाएगा।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?

बीएचयू के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के मुताबिक, 11 अक्टूबर को घट स्थापना के लिए सुबह 11:20 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक का शुभ मुहूर्त है। इस दौरान श्रद्धालु घरों में कलश स्थापित कर नवरात्र का संकल्प ले सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य सुभाष पांडेय के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 11 अक्टूबर को नवरात्र का प्रथम दिवस माना जाएगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग भी रहेगा।

नवरात्र 2026: पूजा और अनुष्ठान की प्रमुख तारीखें

काशी में नवरात्र के दौरान घट स्थापना से लेकर देवी प्रतिमा के विसर्जन तक अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान होंगे। ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडेय के बताए कार्यक्रम के अनुसार, प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:

11 अक्टूबर, रविवार: नवरात्र का पहला दिन और घरों में कलश स्थापना।
16 अक्टूबर, शुक्रवार: बिल्व वृक्ष के पास देवी को निमंत्रण।
17 अक्टूबर, शनिवार: पत्रिका प्रवेश, सरस्वती पूजा और मूर्ति स्थापना।
18 अक्टूबर, रविवार: महाअष्टमी व्रत और रात में महानिशा पूजन।
19 अक्टूबर, सोमवार: महानवमी व्रत। सुबह 7:40 बजे के बाद दुर्गा पाठ और पूजन का हवन शुरू होगा।
20 अक्टूबर, मंगलवार: हवन की प्रक्रिया सुबह 9:20 बजे तक जारी रह सकेगी। देवी के घट और प्रतिमा आदि का विसर्जन भी इसी दिन होगा।
21 अक्टूबर, बुधवार: पूर्ण नवरात्र व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह पारण करेंगे। भगवती की प्रतिमा का उत्थापन और विसर्जन भी इस दिन होगा।

महाअष्टमी और महानवमी पर विशेष पूजा

नवरात्र के दौरान महाअष्टमी और महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस बार 18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत रखा जाएगा। रात में महानिशा पूजन का आयोजन होगा। इसके अगले दिन 19 अक्टूबर को महानवमी व्रत और दुर्गा पाठ से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 19 अक्टूबर को सुबह 7:40 बजे के बाद हवन शुरू किया जा सकेगा, जो 20 अक्टूबर को सुबह 9:20 बजे तक किया जा सकेगा। श्रद्धालुओं को अपने घरों और पूजा परंपरा के अनुसार अनुष्ठान का समय तय करने की सलाह दी जाती है।

21 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण

जो श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक नवरात्र का व्रत रखेंगे, वे 21 अक्टूबर की सुबह पारण करेंगे। देवी के घट और प्रतिमा के विसर्जन को लेकर 20 और 21 अक्टूबर की तारीखें बताई गई हैं। अलग-अलग पूजा पद्धतियों के अनुसार विसर्जन और अन्य अनुष्ठानों का समय अलग हो सकता है।

काशी में नवरात्र के दौरान घरों और मंदिरों में देवी आराधना के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त और प्रमुख पूजा तिथियों की जानकारी पहले से रखना उपयोगी रहेगा।