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मकर संक्रांति पर क्यों बनती है खिचड़ी? कैसे शुरू हुई यह परंपरा, जानें इसके पीछे की मान्यता

 
Makar Sankranti
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Makar Sankranti 2026 : सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं और इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण भी हो गए हैं। सूर्य के मकर राशि में गोचर करने के दिन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। वर्ष 2026 में तिथियों के विशेष संयोग के कारण 14 और 15 जनवरी दोनों ही दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है, जिसको लेकर लोगों में उत्साह के साथ कुछ भ्रम भी देखने को मिल रहा है। मकर संक्रांति देशभर में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। इस दिन दान-पुण्य और खिचड़ी बनाने की भी परंपरा प्रचलित है, लेकिन क्या आप जानते है कि इस दिन हर घर में खिचड़ी क्यों बनाई जाती है, इसके पीछे की क्या मान्यता है।

मकर संक्रांति और खिचड़ी का खास रिश्ता

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की परंपरा उत्तर भारत समेत कई राज्यों में प्रचलित है। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि खास त्योहार पर पुलाव या बिरयानी नहीं, बल्कि खिचड़ी ही क्यों बनाई जाती है। खासकर युवा पीढ़ी में यह जिज्ञासा आम है। इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक तीनों ही कारण बताए जाते हैं।

बाबा गोरखनाथ से जुड़ी मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति पर खिचड़ी की परंपरा का संबंध योगी बाबा गोरखनाथ से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक समय कठिन परिस्थितियों और असुरक्षा के चलते साधु-संतों के लिए नियमित भोजन बनाना मुश्किल हो गया था। ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने चावल, दाल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने का उपाय बताया।

यह भोजन न सिर्फ जल्दी बन जाता था, बल्कि लंबे समय तक शरीर को ऊर्जा भी देता था। धीरे-धीरे यह सरल और पौष्टिक आहार साधु समाज से आम लोगों तक पहुंचा और मकर संक्रांति के पर्व से जुड़ गया। तभी से इस दिन खिचड़ी बनाने और दान करने की परंपरा चली आ रही है।

धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति सूर्य के सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है। इस दिन किया गया दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। खिचड़ी में शामिल चावल, दाल और घी को सात्विक भोजन माना जाता है, जो सूर्य देव को अर्पित करने और दान के लिए श्रेष्ठ समझा जाता है।

मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता व सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि इस दिन खिचड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के साथ-साथ जरूरतमंदों को दान भी किया जाता है।

सेहत के लिहाज से भी फायदेमंद

मकर संक्रांति का पर्व कड़ाके की ठंड के मौसम में आता है। ऐसे समय में खिचड़ी शरीर के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। चावल और दाल का संतुलन शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि घी पाचन तंत्र को मजबूत करता है। हल्की, सुपाच्य और पोषण से भरपूर होने के कारण खिचड़ी सर्दियों में शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है।