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क्या 31 मई को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण? जानिए क्या है ‘स्कॉर्पियो ब्लू मून’

31 मई 2026 को स्कॉर्पियो ब्लू मून रहेगा लेकिन चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा। जानिए साल का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा, भारत में सूतक मान्य होगा या नहीं, ग्रहण का समय, धार्मिक नियम और चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या नहीं।
 
Scorpio Blue Moon
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Scorpio Blue Moon: मई 2026 की पूर्णिमा को लेकर सोशल मीडिया पर चंद्र ग्रहण की कई चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन ज्योतिष और पंचांग के अनुसार 31 मई 2026 को कोई चंद्र ग्रहण नहीं लग रहा है। इस दिन ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पड़ रही है, जिसे ‘स्कॉर्पियो ब्लू मून’ (Scorpio Blue Moon) कहा जा रहा है। खास बात यह है कि इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में मौजूद रहेगा, जिसकी वजह से इसे यह विशेष नाम दिया गया है।

दरअसल, जब किसी एक महीने में दो पूर्णिमा पड़ती हैं तो दूसरी पूर्णिमा के चंद्रमा को ‘ब्लू मून’ कहा जाता है। हालांकि इसका रंग नीला नहीं होता, बल्कि यह एक खगोलीय घटना का नाम है। ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

28 अगस्त 2026 को लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण

जानकारी के अनुसार, साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के दिन लगेगा। ग्रहण सुबह 8:04 बजे शुरू होगा और दोपहर 11:22 बजे समाप्त होगा। यह चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम एशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, इराक और हिंद-प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में दिखाई देगा।

हालांकि भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल वही ग्रहण प्रभावी माना जाता है जो संबंधित स्थान पर दिखाई दे।

क्या होता है स्कॉर्पियो ब्लू मून?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 31 मई 2026 की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। इसी कारण इस पूर्णिमा को ‘स्कॉर्पियो ब्लू मून’ कहा जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में वृश्चिक राशि का संबंध गहराई, रहस्य और भावनात्मक ऊर्जा से माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान कई राशियों पर मानसिक और भावनात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि यह केवल धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

  • ग्रहण काल में कोई नया या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान भोजन बनाने और खाने से बचने की सलाह दी जाती है।
  • मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और मूर्ति पूजा नहीं की जाती।
  • तुलसी के पौधे में जल अर्पित नहीं किया जाता।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय घर से बाहर निकलने और धारदार वस्तुओं के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है।
  • ग्रहण शुरू होने से पहले खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी दल डालकर रखने की परंपरा भी है।

भारत में सूतक क्यों नहीं लगेगा?

धार्मिक नियमों के अनुसार, जिस ग्रहण का दृश्य भारत में नहीं होता, उसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं माना जाता। यही कारण है कि 28 अगस्त 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक भारत में मान्य नहीं होगा।

Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक आस्थाओं और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसकी पुष्टि नहीं की जाती।