Movie prime

दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद कोच गौतम गंभीर फिर विवादों में, कहा – मेरा भविष्य BCCI तय करेगा

 
दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद कोच गौतम गंभीर फिर विवादों में, कहा – मेरा भविष्य BCCI तय करेगा
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

नई दिल्ली I दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-2 से करारी हार के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर एक बार फिर आलोचकों के निशाने पर हैं। गुवाहाटी टेस्ट में मिली 408 रनों की ऐतिहासिक शिकस्त ने फैंस और पूर्व क्रिकेटरों का गुस्सा बढ़ा दिया है। यह 13 महीने में दूसरी बार है जब भारत को घरेलू सरजमीं पर किसी टीम ने टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप किया हो। इससे पहले न्यूजीलैंड ने अक्टूबर-नवंबर 2024 में भारत को 3-0 से मात दी थी।

गुवाहाटी टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका ने भारत को दूसरी पारी में मात्र 140 रन पर ऑलआउट कर 408 रनों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। यह भारत की टेस्ट इतिहास में रनों के लिहाज से सबसे बड़ी हारों में से एक है। पहला टेस्ट कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका ने 30 रन से जीता था।

 गंभीर ने तोड़ी चुप्पी, जिम्मेदारी ली लेकिन उपलब्धियां भी गिनाईं

पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में गौतम गंभीर ने अपनी स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मेरे भविष्य का फैसला बीसीसीआई करेगा। मैंने पहले भी कहा है – मैं नहीं, भारतीय क्रिकेट महत्वपूर्ण है। लेकिन मैं वही कोच हूं जिसने आपको चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का खिताब और इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराई थी।”

गंभीर ने हार की जिम्मेदारी खुद पर लेते हुए कहा, “दोष सभी का है और उसकी शुरुआत मुझसे होती है। 95/1 से 122/7 तक गिरना स्वीकार्य नहीं है। किसी एक खिलाड़ी या एक शॉट को दोष नहीं दे सकते। पूरी टीम जिम्मेदार है। मैं कभी किसी एक खिलाड़ी को सार्वजनिक रूप से दोषी नहीं ठहराता और न ठहराने दूंगा।”

 गंभीर के कोचिंग कार्यकाल में 18 में से 10 टेस्ट हारे 

गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारतीय टीम ने अब तक 18 टेस्ट खेले हैं, जिनमें से 10 में हार का सामना करना पड़ा है। इसमें न्यूजीलैंड से घरेलू 0-3 क्लीन स्वीप और अब दक्षिण अफ्रीका से 0-2 की हार शामिल है।

गंभीर की लगातार आलोचना हो रही है, खासकर टेस्ट टीम में लगातार प्रयोग और अधिक ऑलराउंडर खिलाने की रणनीति को लेकर। इस पर सफाई देते हुए गंभीर ने कहा,  
“टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए आपको बेहद तेजतर्रार या अति-प्रतिभाशाली खिलाड़ी की जरूरत नहीं होती। हमें सीमित कौशल वाले लेकिन मजबूत व्यक्तित्व और दृढ़ चरित्र वाले खिलाड़ियों की जरूरत है। वही अच्छे टेस्ट क्रिकेटर बनते हैं।”