संसद में अखिलेश यादव का हमला, बोले- चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, पेपर लीक...
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को परीक्षा संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं, शिक्षा व्यवस्था और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि "एक 'प्रधान' को हटाकर, आपने असल में 'प्रधानमंत्री' को बचा लिया।"
लोकसभा में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कानून बनने के बावजूद देशभर में बड़े पैमाने पर पेपर लीक की घटनाएं हुईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया और इससे कई लोगों को राहत मिली होगी। उन्होंने कहा, "एक 'प्रधान' को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया गया।"
'बीजेपी नफरत की राजनीति कर रही है'
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नफरत की राजनीति कर रही है। संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया इमरजेंसी से कम नहीं है। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे इमरजेंसी के बाद न्याय मिला था, वैसे ही इस मामले में भी न्याय मिलेगा।
'20 परीक्षाओं के पेपर लीक कैसे हुए?'
अखिलेश यादव ने सरकार से सवाल करते हुए कहा, "जो लोग चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे? सरकार सिर्फ कानून में संशोधन कर रही है। अगर कानून इतना प्रभावी होता, तो भाजपा के 10 साल के शासन में 20 परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो जाते?"
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा, परीक्षा और विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य, जहां से प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, वहां भी पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए।
'सरकार झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए'
अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को यह घमंड था कि वह कभी नहीं झुकती, लेकिन नई पीढ़ी ने साबित कर दिया कि "सरकार झुकती है, बस उसे झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने इसे छात्रों और युवाओं के संघर्ष का परिणाम बताया।
परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की, जबकि सरकार ने विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
