अयोध्या में रामलला के दर्शन करेंगे अखिलेश यादव, CM योगी ने कहा- पहले रामभक्तों से मांगें माफी
अखिलेश यादव 12 दिसंबर को पत्नी डिंपल यादव के साथ अयोध्या स्थित राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1990 में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का जिक्र करते हुए कहा कि राम मंदिर आने से पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या स्थित राम मंदिर जाने के ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अयोध्या में दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, संतों पर लाठियां बरसाईं और अयोध्या की उपेक्षा की, उन्हें राम मंदिर आने से पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए।
दरअसल, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने शनिवार को घोषणा की कि अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल यादव के साथ 12 दिसंबर को अयोध्या जाएंगे। इस दौरान दोनों राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करेंगे। यह राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अखिलेश यादव की पहली प्रस्तावित यात्रा होगी।
योगी आदित्यनाथ ने 1990 की गोलीबारी का किया जिक्र
अयोध्या में दीपोत्सव के 10वें आयोजन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि आंदोलन और कारसेवकों पर हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या की उपेक्षा की, रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और संतों पर लाठीचार्ज कराया, उनका अयोध्या में स्वागत है, लेकिन उन्हें पहले माफी मांगनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को रामभक्तों और संतों से अलग-अलग माफी मांगनी चाहिए और अपने पुराने कार्यों पर पश्चाताप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम सभी को क्षमा करते हैं, लेकिन अहंकारी सत्ता को समाप्त करने में भी देर नहीं लगाते।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 1990 के उस घटनाक्रम की ओर इशारा किया, जब राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी। उस समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार थी।
12 दिसंबर को अयोध्या जाएंगे अखिलेश और डिंपल यादव
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे की जानकारी समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने दी। उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव 12 दिसंबर को राम मंदिर में दर्शन करेंगे। इसके बाद दोनों हनुमानगढ़ी भी जाएंगे।
पवन पांडेय के मुताबिक, अखिलेश यादव परिवार के साथ अयोध्या पहुंचेंगे, मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे और संतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लेंगे। पवन पांडेय को समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर अयोध्या विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।
राम मंदिर की जनवरी 2024 में हुई प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह अखिलेश यादव की पहली प्रस्तावित यात्रा है। इससे पहले वह मंदिर जाने को लेकर कह चुके थे कि इटावा में समाजवादी पार्टी की ओर से बनवाए जा रहे केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद वह राम मंदिर जाएंगे।
धार्मिक कथा में शामिल होने पर भी योगी ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में धार्मिक आयोजनों में कुछ नेताओं के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनका इशारा हाल ही में अयोध्या में आयोजित भागवत कथा में अखिलेश यादव की भागीदारी की ओर था।
योगी ने कहा कि कुछ लोग धार्मिक कथा में जाते हैं, लेकिन उन्हें कथा की मर्यादा और परंपराओं की जानकारी नहीं होती। उन्होंने सवाल उठाया कि धार्मिक कथा में शामिल होने वाले लोग उसे कथा की तरह रखते हैं या मुशायरे की तरह। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की अपनी मर्यादा और परंपराएं होती हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के राम मंदिर जाने के ऐलान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को प्रदेश की सियासत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बीजेपी पहले भी राम मंदिर नहीं जाने को लेकर अखिलेश यादव पर सवाल उठाती रही है। वहीं, अखिलेश यादव राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर बीजेपी और संघ संगठनों पर आरोप लगा चुके हैं।
अयोध्या में राम मंदिर दर्शन के अखिलेश यादव के प्रस्तावित कार्यक्रम ने एक बार फिर राम जन्मभूमि आंदोलन और 1990 में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी के मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
