इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक
प्रयागराज I उत्तर प्रदेश में दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है। अदालत ने अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में हुई।
कोर्ट में क्या हुई बहस
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आया जा सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसी याचिका पर सीधे सुनवाई हो सकती है और इस मामले में ऐसा कोई विशेष आधार नहीं है।
वहीं शंकराचार्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कथित पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के माध्यम से दर्ज कराया गया है, जबकि उसके माता-पिता या अभिभावकों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले 18 जनवरी (अमावस्या) को मारपीट की शिकायत दी गई थी, जिस पर मामला दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद पॉक्सो एक्ट के तहत दूसरी अर्जी दाखिल की गई, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। बचाव पक्ष ने इसे साजिश के तहत दर्ज कराया गया मामला बताया।
जांच और बच्चों को लेकर सवाल
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं हिस्ट्रीशीटर है और उसके खिलाफ गौ हत्या, दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है। अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति के समक्ष क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया और उनके माता-पिता कहां हैं।
इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से बच्चों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। सरकार की ओर से बताया गया कि बाल कल्याण समिति ने बच्चों को उनके माता-पिता को सौंप दिया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जिन बच्चों को पेश किया गया है, उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वे संस्थागत छात्र हैं। साथ ही मेडिकल जांच लगभग एक माह बाद कराए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
शंकराचार्य का बयान
सुनवाई से पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अदालत में “झूठ की कलई खुल जाएगी।” उन्होंने न्यायालय पर भरोसा जताते हुए कहा कि बच्चों के साथ कथित कुकर्म की मेडिकल रिपोर्ट और आरोपों को साबित करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
गौरतलब है कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण के आरोप में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए शंकराचार्य और उनके शिष्य ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। फिलहाल हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए अगली सुनवाई तक संरक्षण प्रदान किया है।
