‘असली हिंदू बनिए, नकली को पहचानिए’... बिना संगम स्नान किए प्रयाग छोड़ काशी पहुंचे शंकराचार्य, एकजुटता का किया आह्वान
प्रयागराज: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार की सुबह माघ मेला क्षेत्र छोड़कर काशी के लिए रवाना हो गए। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) के मुख्य स्नान पर्व पर प्रशासन द्वारा उनके पालकी जुलूस को रोकने और विवाद के बाद उन्होंने संगम में स्नान नहीं किया। करीब 10 दिनों तक विरोध प्रदर्शन और धरने पर बैठे रहने के बाद वे बिना स्नान किए ही प्रयागराज से प्रस्थान कर गए।
प्रस्थान से पहले पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गहरा दुख जताते हुए कहा, "इस समय सनातनी लोगों पर हमला हो रहा है। उनके अधिकार और संस्कार खत्म करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। प्राचीन मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। मौनी अमावस्या पर मैं स्नान नहीं कर पाया। संतों और बटुकों को पीटने के साथ मेरा अपमान किया गया।"
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा और कहा कि कष्टकारी यह है कि इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया।" स्वामी जी ने आगे कहा कि उन्हें इस बार जितना दुख हुआ, उतना पहले कभी नहीं हुआ। वे अपने सम्मान की लड़ाई लड़ते रहेंगे।
उन्होंने सनातन धर्म के अनुयायियों से अपील की, "सनातन धर्म के लोग एकजुट हो जाएं और असली व नकली हिंदू के फर्क को समझें।"
बता दें कि मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य के रथ-पालकी जुलूस को मेला प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा नियमों का हवाला देकर रोका था, जिसके बाद उनके समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू किया, जिस दौरान मेला प्रशासन ने उन्हें 'शंकराचार्य' पद के उपयोग पर नोटिस भी जारी किया। विवाद के दौरान विपक्षी दलों ने उनका समर्थन किया, जबकि सरकार पक्ष ने इसे प्रशासनिक नियमों का पालन बताया।
