मिलावटी खाद्य तेल पर बड़ा एक्शन: UP में 14 फर्मों पर बैन, लेड की खतरनाक मात्रा मिली
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने 14 फर्मों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों को अब किसी भी प्रकार के खाद्य तेल या वसायुक्त उत्पाद के निर्माण, बिक्री, भंडारण और वितरण की अनुमति नहीं होगी।
एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। विभाग को प्रदेश में खाद्य तेलों में मिलावट की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद 23 फरवरी को व्यापक जांच अभियान चलाया गया।
इस अभियान के तहत 58 टीमों ने 64 खाद्य तेल इकाइयों की जांच की। इनमें से 56 इकाइयों से कुल 206 नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों की जांच भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में कराई गई, जहां कई नमूने असुरक्षित और मानक के विपरीत पाए गए।
जांच में सामने आया कि कुछ उत्पादों में लेड (सीसा) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इसके अलावा कई कंपनियां बिना अनुमति के अलग-अलग तेलों का मिश्रण कर रही थीं। वहीं, फोर्टिफाइड तेलों में आवश्यक विटामिन की मात्रा भी मानक से कम पाई गई, जिससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा था।
इन फर्मों पर लगा प्रतिबंध
लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात, आगरा, हाथरस, मेरठ, हापुड़ और गोरखपुर की कुल 14 फर्मों को इस कार्रवाई के दायरे में लिया गया है। इनमें प्रमुख रूप से हिंद वेज ऑयल प्राइवेट लिमिटेड (लखनऊ), संकट मोचन एंटरप्राइजेस (लखनऊ), कटारिया एडिबल्स (कानपुर), एनएम ऑयल कॉरपोरेशन (आगरा), जीएस एग्रो फूड्स (मेरठ) और जय लक्ष्मी सोलवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (गोरखपुर) शामिल हैं।
सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने स्पष्ट कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लेड जैसे हानिकारक तत्वों की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है और दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
