UP में निजी कार मालिकों के लिए बड़ी राहत, अब नहीं देना होगा फिटनेस प्रमाणपत्र
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में निजी वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिली है। अब ड्राइवर को छोड़कर छह से अधिक और अधिकतम नौ सीट क्षमता वाले निजी गैर-परिवहन वाहनों के लिए हर साल फिटनेस प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य नहीं होगा। शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग ने इस संबंध में नया परिपत्र जारी कर पूर्व के आदेश को निरस्त कर दिया है।
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की ओर से 15 सितंबर 2026 को जारी परिपत्र संख्या-1877 सा०प्र०/202667टीआर/2020 में स्पष्ट किया गया है कि केवल सीट क्षमता के आधार पर किसी निजी मोटर कार से फिटनेस प्रमाणपत्र मांगना कानूनन उचित नहीं है।
आरटीओ को दिए गए निर्देश
परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) को निर्देश दिया है कि निजी गैर-परिवहन वाहनों से केवल उनकी सीट क्षमता के आधार पर फिटनेस प्रमाणपत्र लेने की अनिवार्यता न लगाई जाए। इस फैसले से ऐसे निजी वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जिनसे अब तक फिटनेस प्रमाणपत्र की मांग की जा रही थी।
पूर्व मंत्री शतरुद्र प्रकाश ने उठाया था मामला
यह मामला पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शतरुद्र प्रकाश ने शासन के सामने उठाया था। उन्होंने बताया कि उनकी निजी उपयोग वाली इनोवा UP 65 CK 0999 के फिटनेस को लेकर आरटीओ वाराणसी की ओर से नोटिस जारी किया गया था और वाहन जब्त करने की चेतावनी दी गई थी।
शतरुद्र प्रकाश के मुताबिक, उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए नोटिस वापस लेने के लिए पत्र लिखा, जिसके बाद नोटिस वापस ले लिया गया। हालांकि, उनका कहना था कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में निजी वाहन मालिकों से फिटनेस प्रमाणपत्र की मांग की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर 7 जुलाई 2020 को तत्कालीन प्रमुख सचिव परिवहन और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र भेजा गया था। इसके अलावा विधान परिषद की कमेटी के सामने भी यह मामला रखा गया।
