लखनऊ में 72 अवैध चैंबर और दुकानों पर चला बुलडोजर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की बड़ी कार्रवाई
लखनऊ। हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद लखनऊ में रविवार शाम नगर निगम ने बड़ी बुलडोजर कार्रवाई की। कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के आसपास बने 72 अवैध चैंबरों और दुकानों को नगर निगम की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान कुछ वकीलों ने विरोध किया, लेकिन भारी सुरक्षा के बीच नगर निगम का अभियान जारी रहा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने अवैध कब्जेदारों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे। नोटिस में कब्जेदारों को अवैध निर्माण स्वयं हटाने और यदि निर्माण वैध है तो सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उसके संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
अवैध चैंबरों और दुकानों को बचाने के लिए कुछ वकीलों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद रविवार को नगर निगम ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू कर दी।
वीआईपी कार्यक्रम के चलते पुलिस बल शाम करीब पांच बजे उपलब्ध हुआ, जिसके बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जों को हटाना शुरू किया।
पहले भी हो चुका है कार्रवाई का प्रयास
इस मामले में अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवांशी श्रीवास्तव और उनकी माता अरुणिमा श्रीवास्तव ने अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनकी याचिका पर 11 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कचहरी रोड से अवैध कब्जे हटाने का आदेश दिया था।
हालांकि, पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद कोर्ट ने जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए और कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की।
17 मई को भी हुआ था बुलडोजर एक्शन
कोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने 17 मई को भारी पुलिस बल के बीच 72 अस्थायी कब्जों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। उस दौरान वकीलों ने जमकर विरोध किया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा था और कुछ समय बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी थी।
बाद में नगर निगम ने हाईकोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। चार अगस्त को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले में रुख और सख्त करते हुए शेष अवैध चैंबरों और दुकानों के कब्जेदारों को अंतिम अवसर दिया था।
19 अगस्त को जारी हुए थे नोटिस
नगर निगम ने इसके बाद 19 अगस्त को करीब 100 अवैध कब्जेदारों को नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों को वकीलों के अधिकांश चैंबरों पर चस्पा किया गया था और 30 अगस्त से पहले अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए थे।
इनमें हाईकोर्ट में सूचीबद्ध 72 अवैध कब्जेदारों के नाम भी शामिल थे। इसके अलावा निबंधन कार्यालय के सामने नाले के ऊपर किए गए अवैध निर्माण भी कार्रवाई के दायरे में रखे गए थे।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कब्जेदारों को अपने निर्माण के वैध होने का प्रमाण प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित चैंबर और दुकानों को ध्वस्त किया जाए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि कब्जेदारों को अपने अवैध कब्जे की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद न्यायहित में उन्हें अंतिम अवसर दिया जा रहा है।
