Movie prime

UP में आपदा से मौत पर अब 8 लाख रुपये का मुआवजा, फसल नुकसान की राहत राशि 30% तक बढ़ी; 10 लाख किसानों को मिलेगा लाभ
 

 
 UP में आपदा से मौत पर अब 8 लाख रुपये का मुआवजा, फसल नुकसान की राहत राशि 30% तक बढ़ी; 10 लाख किसानों को मिलेगा लाभ
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों और परिवारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार ने आपदा में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता दोगुनी कर दी है। अब मृतकों के आश्रितों को 4 लाख रुपये के बजाय 8 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को होने वाले नुकसान पर मिलने वाली राहत राशि में भी 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

1 अप्रैल से 4 नवंबर तक हुए नुकसान पर लागू होंगे नए मानक

प्रदेश सरकार ने राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता के मानकों में संशोधन किया है। बढ़ी हुई राहत राशि का लाभ 1 अप्रैल 2026 से 4 नवंबर 2026 के बीच प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए पात्र नुकसान पर भी मिलेगा। राहत आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारियों से इस अवधि में हुए नुकसान का विवरण मांगा है।

किसानों को फसल नुकसान पर मिलेगी अधिक सहायता

संशोधित मानकों के अनुसार, सिंचित क्षेत्रों में फसल नुकसान पर मिलने वाली आर्थिक सहायता 17,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं, वर्षा आधारित यानी असिंचित क्षेत्रों में सहायता राशि 8,500 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।

बारहमासी फसलों और कृषि वानिकी को नुकसान होने पर अब 22,500 रुपये के स्थान पर 30,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी। इससे बाढ़, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल बर्बाद होने वाले किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कृषि भूमि और रेशम उत्पादन के नुकसान पर भी बढ़ी राहत

प्राकृतिक आपदाओं के कारण कृषि भूमि पर जमा गाद हटाने के लिए सहायता राशि 18,000 रुपये से बढ़ाकर 23,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। भूस्खलन और हिमस्खलन से भूमि को नुकसान पहुंचने पर आर्थिक सहायता 47,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित की गई है।

इसके अलावा, मूगा रेशम उत्पादन में नुकसान होने पर सहायता राशि 7,500 रुपये से बढ़ाकर 9,800 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है। अन्य रेशम उत्पादन गतिविधियों के लिए भी संशोधित राहत दरें तय की गई हैं।

पशुपालकों को राहत, बड़े पशुओं की मौत पर मिलेंगे 50 हजार रुपये

योगी सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं में पशुधन के नुकसान पर मिलने वाली आर्थिक सहायता भी बढ़ा दी है। गाय, भैंस, घोड़े और ऊंट जैसे बड़े पशुओं की मृत्यु पर मिलने वाली सहायता राशि 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है।

वहीं, बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं की मृत्यु पर अब 4,000 रुपये के बजाय 5,500 रुपये की सहायता मिलेगी। भार ढोने वाले पशुओं और मुर्गीपालकों के लिए भी मुआवजे की दरों में बढ़ोतरी की गई है।

मकानों के नुकसान और राहत शिविरों के लिए भी नए प्रावधान

प्राकृतिक आपदाओं के कारण मकान क्षतिग्रस्त होने पर मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी वृद्धि की गई है। नए प्रावधानों के तहत मैदानी क्षेत्रों में मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर 1.85 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही आपदा प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में 30 दिनों तक सहायता और सूखे की स्थिति में 90 दिनों तक पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। स्कूलों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को होने वाले नुकसान के लिए भी राहत राशि बढ़ाई गई है।

10 लाख से अधिक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद

सरकार के अनुसार, संशोधित राहत मानकों से प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। संबंधित जिलों से नुकसान का विवरण प्राप्त होने और पात्रता के सत्यापन के आधार पर प्रभावित किसानों तथा परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक संकट का सामना करने वाले किसानों, पशुपालकों और अन्य प्रभावित परिवारों को पहले से अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करना है।