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140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो कोई ताकत सामने नहीं टिकेगी, CM योगी ने दिया सनातन एकता का संदेश
 

 
 140 करोड़ लोग एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो कोई ताकत सामने नहीं टिकेगी, CM योगी ने दिया सनातन एकता का संदेश
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सनातन धर्म की एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज की सुरक्षा और मजबूती इसी एकजुटता में निहित है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पंथ और संप्रदायों की उपासना पद्धतियां भले ही अलग हों, लेकिन सभी का कल्याण वृहद सनातन धर्म की मजबूती में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के 140 करोड़ लोग यदि एक स्वर में हुंकार भरेंगे तो दुनिया की कोई ताकत उनके सामने नहीं ठहर सकती। उन्होंने कहा कि अलग-अलग गति प्रगति की बजाय दुर्गति का कारण बन सकती है और अलग-अलग स्वर शक्ति के बजाय पराजय का कारण बनेंगे।

योगी आदित्यनाथ मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित सप्त दिवसीय समारोह के तहत व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दोनों संतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक योगदान को याद किया।

'भ्रम फैलाने वालों को पहचानें रामभक्त'

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम और सनातन के वैभव को स्वीकार नहीं कर पाने वाले लोग दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने रामायण के कालनेमि प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह हनुमान जी ने कालनेमि को पहचान लिया था, उसी तरह रामभक्तों को भी भ्रम फैलाने वालों की पहचान करनी होगी।

उन्होंने महंत दिग्विजयनाथ के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि वे भारत की स्वतंत्रता को केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं मानते थे, बल्कि सांस्कृतिक स्वतंत्रता को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ का मानना था कि यदि सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार हो सकता है तो अयोध्या में भी श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ा कार्य होना चाहिए।

राम मंदिर आंदोलन में महंत दिग्विजयनाथ के योगदान का किया जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1949 में रामलला के प्रकटीकरण के समय महंत दिग्विजयनाथ, बाबा अभिराम दास और महंत रामचंद्र दास परमहंस सक्रिय थे। उन्होंने उस दौर में अयोध्या आंदोलन से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सदियों के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर सनातन धर्मावलंबियों को गौरव की अनुभूति करा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और विंध्यवासिनी धाम के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया के सामने सनातन परंपरा की सामर्थ्य को प्रस्तुत किया।

शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को किया याद

सीएम योगी ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने वर्ष 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। इसका उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से स्वदेश, स्वाभिमान और स्वधर्म की भावना को मजबूत करना था।

उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में महंत दिग्विजयनाथ की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए गोरक्षपीठ की संपत्ति और संस्थाओं तक का सहयोग दिया गया।

मुख्यमंत्री के अनुसार आज महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अंतर्गत करीब 50 से 55 संस्थाएं संचालित हो रही हैं। इनमें विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज, आयुर्वेद कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, विद्यालय, अस्पताल और कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ ने बालिका शिक्षा को भी बढ़ावा दिया और इसके लिए विद्यालय तथा महाविद्यालय स्थापित किए। गोरखपुर में फर्टिलाइजर कारखाने और बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़े प्रयासों में भी उनका योगदान रहा।

'गोरक्षपीठ में जाति-पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं'

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ नाथ संप्रदाय की प्रमुख पीठ होने के बावजूद पूरे सनातन धर्म के लिए समर्पित है। यहां जाति, पंथ और संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। सभी वर्गों के लोग एक साथ भोजन करते हैं और विभिन्न परंपराओं के संतों एवं आचार्यों को समान सम्मान दिया जाता है।

कार्यक्रम में अयोध्या से आए जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य ने महंत दिग्विजयनाथ के शिक्षा, स्वास्थ्य और भारतीय परंपरा के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया। काशी के जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल दास वेदांती ने संत परंपरा और लोककल्याण के संबंध पर अपने विचार रखे।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि वर्ष 1932 में शिक्षा के क्षेत्र में शुरू किया गया प्रयास आज विशाल स्वरूप ले चुका है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रामनरेश पांडे की पुस्तक ‘श्री हनुमत् कथा पूजनम्’ का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपस्थित संतों ने विमोचन भी किया। इस अवसर पर कई संत, धर्माचार्य और गणमान्य लोग मौजूद रहे।