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औरैया में बुजुर्ग ने जीते-जी कर डाली अपनी ‘तेरहवीं’, 1900 लोगों को खिलाया भोज; अकेलेपन ने लिया अनोखा फैसला
 

 
 औरैया में बुजुर्ग ने जीते-जी कर डाली अपनी ‘तेरहवीं’, 1900 लोगों को खिलाया भोज; अकेलेपन ने लिया अनोखा फैसला
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औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 64 वर्षीय राकेश यादव ने अपनी मौत का इंतजार करने के बजाय जीते-जी ही अपनी ‘तेरहवीं’ का भोज आयोजित कर दिया। इस अनोखे आयोजन में करीब 1900 लोगों को आमंत्रित किया गया और सभी को भरपेट भोजन कराया गया। इस ‘जिंदा तेरहवीं’ की खबर अब पूरे इलाके में तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है।

राकेश यादव का कहना है कि परिवार में अब उनका साथ देने वाला कोई नहीं बचा है। उनके भाइयों का निधन हो चुका है और बहन की शादी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें अपने अंतिम संस्कार और तेरहवीं की चिंता सताने लगी थी। इसी चिंता और अकेलेपन के कारण उन्होंने यह अनोखा फैसला लिया। उन्होंने अपना घर भी एक रिश्तेदार को दे दिया है और अब एक साधारण झोपड़ी में रह रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें भरोसा नहीं कि उनकी मृत्यु के बाद कोई उनकी जिम्मेदारी निभाएगा।

मेहनत की कमाई से कराया भोज

राकेश यादव ने बताया कि इस आयोजन में किसी प्रकार की धार्मिक क्रिया नहीं कराई गई, केवल लोगों के लिए भोज का इंतजाम किया गया। यह पूरा खर्च उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई और मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन से उठाया। उन्होंने किसी से मदद नहीं ली, बल्कि वर्षों की मेहनत-मजदूरी से बचाए गए पैसों को जोड़कर यह आयोजन किया।

पूड़ी-सब्जी और हलवे का किया गया इंतजाम

इस अनोखे भंडारे के लिए बाकायदा निमंत्रण पत्र भी बांटे गए थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिनके लिए पूड़ी-सब्जी और हलवे का इंतजाम किया गया था। करीब 1900 लोगों के जुटने से आयोजन काफी बड़ा बन गया।

इलाके में चर्चा का विषय बना आयोजन

एक जीवित व्यक्ति द्वारा अपनी ही तेरहवीं का भोज कराने की घटना ने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। कार्यक्रम में पहुंचे लोगों के लिए यह अनुभव काफी अलग रहा—एक तरफ दावत की खुशी थी, तो दूसरी ओर यह एहसास भी कि यह आयोजन किसी जीवित व्यक्ति की ‘तेरहवीं’ के नाम पर किया जा रहा है। फिलहाल यह अनोखी पहल औरैया ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।