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लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद SIT ने शुरू की जांच, 19 अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

 
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लखनऊ के अलीगंज स्थित अवैध व्यावसायिक भवन में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने मंगलवार से मामले की गहन जांच शुरू कर दी। टीम हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

दो सदस्यीय एसआईटी, जिसमें अपर मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं, ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। टीम ने करीब एक घंटे तक भवन की स्थिति का अध्ययन किया और बाद में ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों से भी बातचीत की।

अवैध निर्माण की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश

जांच के दौरान एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर एकल आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन तीन मंजिला व्यावसायिक परिसर में कैसे तब्दील हो गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था और इसके लिए कमर्शियल बिजली कनेक्शन भी लिया गया था।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने वर्ष 2016 से 2019 के बीच इस क्षेत्र में तैनात रहे 19 अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची एसआईटी को सौंप दी है। इनमें जोनल अधिकारी, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और सुपरवाइजर शामिल हैं। इनमें से एक अधिकारी एके सिंह का निधन हो चुका है।

ध्वस्तीकरण आदेश वापस लेने वाले अधिकारी भी जांच के दायरे में

एसआईटी की जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वर्ष 2016 में भवन को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था, लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया। अब इस निर्णय की भी जांच की जा रही है।

एलडीए की पांच सदस्यीय आंतरिक जांच समिति ने भी संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट शासन और एसआईटी को सौंप दी गई है।

ड्रोन सर्वे और फोरेंसिक जांच जारी

घटनास्थल पर पुलिस ने ड्रोन कैमरों की मदद से विस्तृत वीडियोग्राफी कराई है ताकि कोई भी महत्वपूर्ण साक्ष्य छूट न जाए। वहीं फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने सात मोबाइल फोन, पहचान पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त कर जांच के लिए भेजी है।

एसआईटी ने जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और एलडीए उपाध्यक्ष से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। जांच टीम विभिन्न विभागों के अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है।

चार आरोपी भेजे गए जेल

मामले में पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनिमेशन एवं गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेट शॉप एवं क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय तथा नेटवर्किंग कार्य से जुड़े सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इन सभी आरोपियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पूछताछ के बाद अदालत में पेश किए जाने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

सात दिन में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया था और केजीएमयू में भर्ती घायलों से भी मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए थे।

एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपनी है। अधिकारियों का कहना है कि हर विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अमृत अभिजात ने बताया कि घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया है और फोरेंसिक टीम ने महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। वहीं एडीजी प्रवीण कुमार ने कहा कि जांच का दायरा व्यापक रखा गया है और सभी संबंधित विभागों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।