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प्रयागराज में NEET छात्रा की मौत: 8 पन्नों के नोट में मानसिक परेशानी का जिक्र, तीसरी काउंसलिंग में मिली थी MBBS सीट
 

 
 प्रयागराज में NEET छात्रा की मौत: 8 पन्नों के नोट में मानसिक परेशानी का जिक्र, तीसरी काउंसलिंग में मिली थी MBBS सीट
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 18 वर्षीय नीट छात्रा ऋतु शर्मा की आत्महत्या के मामले में नई जानकारी सामने आई है। झूंसी थाना क्षेत्र के त्रिवेणीपुरम स्थित उसके कमरे से मिले आठ पन्नों के नोट में लंबे समय से चल रही मानसिक परेशानी, पढ़ाई के दौरान आने वाले अनचाहे विचारों और बार-बार चीजों को दोहराने की मजबूरी का जिक्र है। छात्रा की मौत के बाद सोमवार को हुई नीट की तीसरे चरण की काउंसलिंग में उसे सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट आवंटित होने की जानकारी भी सामने आई।

दो वर्षों से मानसिक परेशानी से जूझ रही थी छात्रा

ऋतु ने अपने नोट में बताया था कि 11वीं और 12वीं कक्षा के दौरान उसे मानसिक परेशानियां होने लगी थीं। पढ़ाई करते समय उसके मन में लगातार अनचाहे विचार और शंकाएं आती थीं। किसी विषय को अच्छी तरह समझने के बावजूद उसे बार-बार पढ़ने की जरूरत महसूस होती थी। ऐसा नहीं करने पर परीक्षा में गलती होने या असफल होने का डर बना रहता था।

शुरुआत में वह इन समस्याओं को सामान्य तनाव और जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत समझती थी। कुछ सप्ताह पहले इंटरनेट पर जानकारी पढ़ने के बाद उसे लगा कि उसके अनुभव ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के लक्षणों से मिलते-जुलते हैं। हालांकि, छात्रा में ओसीडी की चिकित्सकीय पुष्टि हुई थी या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

नोट में उसने आत्मविश्वास की कमी, भविष्य को लेकर चिंता और अपने लक्ष्यों को हासिल न कर पाने के डर का भी जिक्र किया। वह मानसिक रूप से शांत रहकर पढ़ाई करना और मेडिकल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती थी।

तीसरे राउंड की काउंसलिंग में मिली थी MBBS सीट

ऋतु लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसने वर्ष 2022 में प्रयागराज के दिल्ली पब्लिक स्कूल से हाईस्कूल और 2024 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

नीट 2026 में उसकी ऑल इंडिया रैंक 10,74,272 थी। काउंसलिंग के पहले दो चरणों में सीट आवंटित नहीं होने से वह निराश थी।

सोमवार, 2 नवंबर को तीसरे चरण की काउंसलिंग का परिणाम जारी हुआ। इसमें ऋतु को ईडब्ल्यूएस-दिव्यांग श्रेणी के तहत सोनभद्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट आवंटित हुई। परिजनों को शाम करीब साढ़े चार बजे इसकी जानकारी मिली।

बताया गया कि ऋतु को आंखों से संबंधित परेशानी थी, जिसके आधार पर उसका दिव्यांगता प्रमाणपत्र बना था।

कमरे से मिला शव, पुलिस ने शुरू की जांच

घटना सोमवार को झूंसी के त्रिवेणीपुरम कॉलोनी के गंगा सेक्टर में सामने आई। ऋतु अपने परिवार के साथ यहां रहती थी।

पिता देवराज शर्मा के अनुसार, बेटी देर रात तक पढ़ाई करती थी और आमतौर पर अगले दिन दोपहर में अपने कमरे से बाहर आती थी। सोमवार को काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों को चिंता हुई।

परिवार के सदस्यों ने कमरे के भीतर देखा तो ऋतु मृत अवस्था में मिली। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

मौके पर एसीपी झूंसी अरुण पाराशर और इंस्पेक्टर नरेश कुमार कश्यप पुलिस टीम के साथ पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए।

पुलिस ने मौके से एक लाइसेंसी हथियार बरामद किया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है। घटना कब हुई और इसके पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही, इसकी जांच की जा रही है।

बेटी की मौत से परिवार में शोक, भाई देहरादून से लौटा

ऋतु के पिता डॉ. देवराज शर्मा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं। परिवार मूल रूप से गाजीपुर जिले के नोनहरा थाना क्षेत्र के अनुईपुर गांव का रहने वाला है। करीब छह वर्ष पहले परिवार प्रयागराज के त्रिवेणीपुरम में आकर बस गया था।

ऋतु का जुड़वां भाई ऋषिराज देहरादून में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बहन की मौत की सूचना मिलने पर वह मंगलवार सुबह घर पहुंचा। बेटी और बहन को खोने से पिता और भाई गहरे सदमे में हैं।

पिता ने बताया कि रविवार रात ऋतु ने परिवार के साथ भोजन किया था। इसके बाद वह सामान्य तरीके से अपने कमरे में चली गई थी। उस समय परिवार को उसकी मानसिक स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं हो सका।

पोस्टमार्टम के बाद दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार

मंगलवार को डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच ऋतु के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

परिवार के सदस्य शव को दारागंज घाट ले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पिता, भाई, चाचा और अन्य रिश्तेदार मौजूद रहे।

मानसिक परेशानी और मौत के कारणों की जांच जारी

एसीपी अरुण पाराशर के अनुसार, परिजनों से पूछताछ में सामने आया है कि नीट काउंसलिंग के शुरुआती दो चरणों में सीट नहीं मिलने से ऋतु तनाव में थी। हालांकि, तीसरे चरण में उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट आवंटित हो गई थी।

छात्रा के नोट में मानसिक परेशानियों का जिक्र मिलने के बाद पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। केवल परीक्षा के दबाव या ओसीडी जैसे लक्षणों को उसकी मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता।

यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग और समय पर विशेषज्ञ सहायता की जरूरत जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान दिलाती है। लगातार परेशान करने वाले विचारों, अत्यधिक चिंता या बार-बार किसी काम को दोहराने की मजबूरी जैसी समस्याओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद ली जा सकती है।