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UP में कैब-डिलीवरी सेवाओं के लिए नई नियमावली, बिना वजह राइड कैंसिल करने पर लगेगा जुर्माना
 

 
 UP में कैब-डिलीवरी सेवाओं के लिए नई नियमावली, बिना वजह राइड कैंसिल करने पर लगेगा जुर्माना
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने नई नियमावली का प्रस्ताव जारी किया है। परिवहन विभाग ने उत्तर प्रदेश मोटर यान (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 के तहत ओला, उबर समेत अन्य ऐप आधारित एग्रीगेटर सेवाओं के संचालन के लिए कई मानक प्रस्तावित किए हैं। सरकार की ओर से upmyfleet.com एग्रीगेटर पोर्टल भी शुरू किया गया है।

नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवरों के कल्याण, वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही कैब का किराया पारदर्शी रखने और यात्रियों की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं।

बिना वैध कारण राइड कैंसिल करने पर कटेगा 10 फीसदी किराया

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, राइड बुक होने के बाद यदि कोई ड्राइवर बिना किसी वैध कारण के यात्रा रद्द करता है तो कुल किराये का 10 प्रतिशत काटा जाएगा। वहीं, यात्री को अगली बुकिंग में कुछ रियायत दिए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है।

दूसरी ओर, यदि राइड बुक करने के बाद यात्री स्वयं उसे कैंसिल करता है तो अगली बुकिंग में किराये का 10 प्रतिशत या अधिकतम 100 रुपये, जो भी कम हो, वसूले जाने का प्रावधान रखा गया है।

एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस जरूरी

नई नियमावली के तहत प्रदेश में संचालित सभी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म, डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स से जुड़ी परिवहन सेवाओं के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। कंपनियों को लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

प्रस्ताव के मुताबिक, आवेदन के समय 25 हजार रुपये आवेदन शुल्क और 5 लाख रुपये लाइसेंस शुल्क देना होगा। इसके अलावा वाहनों की संख्या के आधार पर 10 लाख से 50 लाख रुपये तक की सुरक्षा जमा राशि भी जमा करनी होगी। लाइसेंस की वैधता 5 वर्ष प्रस्तावित की गई है।

यात्रियों की सुरक्षा और शिकायतों पर जोर

सरकार का उद्देश्य ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं में कंपनियों, ड्राइवरों और ग्राहकों की जिम्मेदारियां तय करना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बुकिंग के बाद मनमाने तरीके से राइड कैंसिल करने, किराये को लेकर विवाद और शिकायतों के निस्तारण में होने वाली देरी पर अंकुश लगाने की उम्मीद है।