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UP में गोशालाओं को सर्कुलर इकोनॉमी से जोड़ने की तैयारी, यूएन संस्था के साथ होगा एमओयू
 

 
गोशाला
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लखनऊ: प्रदेश में गोवंश संरक्षण को नई दिशा देने के लिए गोशालाओं को चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। इसके तहत Food and Agriculture Organization (एफएओ) इंडिया, राज्य के पशुधन विभाग और Pandit Deen Dayal Upadhyaya Veterinary University (दुवासु) मथुरा के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर जल्द हस्ताक्षर होंगे।

शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव (पशुधन) मुकेश मेश्राम की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस एमओयू की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई, जहां नीति, अनुसंधान और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के समन्वय से बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

एमओयू के तहत चार मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी है—मजबूत हरा चारा मूल्य श्रृंखला का विकास, गोबर और कृषि अवशेषों से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बायो-सीएनजी का उत्पादन, तथा “वन हेल्थ” आधारित पशु रोग निगरानी तंत्र की स्थापना।

इस निगरानी तंत्र में फार्माकोविजिलेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे पशुओं में फैलने वाली बीमारियों पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।

योजना के तहत सबसे पहले प्रदेश की गोशालाओं के नेटवर्क का उपयोग करते हुए मथुरा और गोरखपुर में इस मॉडल की शुरुआत की जाएगी। इसका उद्देश्य एकीकृत संसाधन उपयोग का प्रभावी मॉडल विकसित करना है।

एमओयू में FAO India ज्ञान भागीदार की भूमिका निभाएगा और वैश्विक विशेषज्ञता व तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा, जबकि दुवासु मथुरा इन योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

बैठक में एफएओ इंडिया के प्रमुख ताकायुकी हागीवारा, डॉ. आरके सिंह, दुवासु के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्र और मुख्यमंत्री के सलाहकार जीएन सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।