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69000 शिक्षक भर्ती मामले में 2 फरवरी से लखनऊ में धरना, 31 जनवरी को विधानसभा घेराव का आह्वान
 

 
 69000 शिक्षक भर्ती मामले में 2 फरवरी से लखनऊ में धरना, 31 जनवरी को विधानसभा घेराव का आह्वान
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से इस प्रकरण पर कोई सक्रिय पहल नहीं की जा रही, जिसके कारण मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है और बार-बार सुनवाई की तारीखें मिल रही हैं।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल और धनंजय गुप्ता ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में हुई थी, लेकिन उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख पड़ रही है। अब अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की अनदेखी के कारण न्याय में देरी हो रही है।

इससे नाराज अभ्यर्थियों ने 2 फरवरी से लखनऊ में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का फैसला किया है। आंदोलन की तैयारी के तहत सभी जिला कोऑर्डिनेटरों से ब्लॉक स्तर पर अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की सूची तैयार करने को कहा गया है। साथ ही 31 जनवरी को विधानसभा घेराव का भी आह्वान किया गया है।

अमित मौर्य ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट तथा लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला सभी उनके पक्ष में हैं। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा, क्योंकि वे पिछड़े और दलित समाज से आते हैं।

धनंजय गुप्ता और विक्रम यादव ने बताया कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी पिछले लगभग छह वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकार से बार-बार मांग करने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही। सुनवाई में देरी से सभी अभ्यर्थी आहत और निराश हैं।

यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, जिसमें परिणाम आने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ व्यापक अन्याय का आरोप लगा था। हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया था, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद लंबित है। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में मजबूती से पैरवी करे और जल्द न्याय सुनिश्चित करे।