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पीलीभीत में रजिस्ट्री प्रक्रिया होगी हाईटेक: फिंगरप्रिंट के साथ अब रेटीना स्कैन से होगा सत्यापन
 

 
 पीलीभीत में रजिस्ट्री प्रक्रिया होगी हाईटेक: फिंगरप्रिंट के साथ अब रेटीना स्कैन से होगा सत्यापन
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पीलीभीत। संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए निबंधन विभाग ने एक अहम कदम उठाया है। अब रजिस्ट्री कार्यालयों में क्रेता-विक्रेता और गवाहों की पहचान केवल फिंगरप्रिंट पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि रेटीना स्कैन के माध्यम से भी सत्यापन किया जाएगा।

अब तक रजिस्ट्री के दौरान बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के लिए फिंगरप्रिंट का ही उपयोग होता था। लेकिन 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा खेतों और कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की उंगलियों की रेखाएं घिस जाने के कारण मशीनें अक्सर फिंगरप्रिंट स्वीकार नहीं करती थीं। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया अटक जाती थी और संबंधित पक्षों को कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे।

आईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सदर, पूरनपुर और बीसलपुर तहसीलों के निबंधन कार्यालयों में फिलहाल फिंगरप्रिंट के माध्यम से रजिस्ट्री हो रही है, लेकिन अब इन कार्यालयों को रेटीना स्कैनर मशीनों और नए सॉफ्टवेयर से लैस किया जा रहा है। यह व्यवस्था आधार प्रमाणीकरण की तर्ज पर कार्य करेगी, जिससे पहचान की शुद्धता सुनिश्चित होगी और धोखाधड़ी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

बुजुर्गों और श्रमिकों को मिलेगी राहत

फिंगरप्रिंट मैच न होने की समस्या के कारण पहले कई मामलों में सॉफ्टवेयर पक्षकारों को रिजेक्ट कर देता था और मैन्युअल वेरिफिकेशन में लंबा समय लगता था। अब रेटीना स्कैनिंग की सुविधा उपलब्ध होने से आंखों के स्कैन के जरिए तुरंत और सटीक पहचान संभव होगी, जिससे बुजुर्गों और श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

तीनों तहसीलों में लागू होगी नई व्यवस्था

सदर तहसील सहित पूरनपुर और बीसलपुर के निबंधन कार्यालयों में रेटीना स्कैन की व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जा रही है। उप-निबंधकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भी पक्षकार के फिंगरप्रिंट में समस्या आए तो तत्काल रेटीना स्कैनर का उपयोग किया जाए।

आईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि फिंगरप्रिंट न आने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह विकल्प उपलब्ध कराया गया है। सभी जिला निबंधकों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के दौरान किसी भी पक्षकार को असुविधा न हो और तकनीकी सुविधाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित किया जाए।