चार्टर्ड प्लेन में आराम, पोर्श-डिफेंडर का काफिला, हाथी-ऊंट पर सवारी... माघ मेले में छाए सतुआ बाबा कौन हैं?
प्रयागराज I प्रयागराज में चल रहे माघ मेले 2026 में आस्था के साथ-साथ एक अनोखी चर्चा छाई हुई है। काशी के विष्णुस्वामी संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरु महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा अपनी शाही लाइफस्टाइल और महंगी कारों के कारण सुर्खियों में हैं। ब्रांडेड चश्मे, लग्जरी एक्सेसरीज और अब करोड़ों की स्पोर्ट्स कारों के साथ बाबा के शिविर के बाहर फोटो और सेल्फी के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग रही है।
सतुआ बाबा पहले लैंड रोवर डिफेंडर (कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक) लेकर मेले में पहुंचे थे, जिसने काफी ध्यान खींचा। अब उनके काफिले में नई पोर्श 911 टर्बो (कीमत करीब 4.5-5 करोड़ रुपये) शामिल हो गई है। इस नई कार के पहुंचते ही बाबा ने विधि-विधान से इसका पूजन किया, जिसमें कई साधु-संत मौजूद रहे। दोनों गाड़ियों की कुल कीमत 5 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
सतुआ बाबा कौन हैं?
सतुआ बाबा का असली नाम संतोष तिवारी है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के मसौरा गांव में हुआ था। माता का नाम राजा बेटी और पिता का नाम शभाराम तिवारी है। महज 11 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। विष्णुस्वामी संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, पीठ के मुखिया को 'सतुआ बाबा' कहा जाता है। 2012 में पूर्व पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन यमुनाचार्य महाराज के निधन के बाद संतोष तिवारी को इस पीठ का 57वां आचार्य बनाया गया। वे वाराणसी की सतुआ बाबा पीठ के प्रमुख हैं और महाकुंभ 2025 में उन्हें जगतगुरु की उपाधि मिली।
बाबा कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ नजर आए हैं, जिससे उन्हें सीएम का करीबी माना जाता है। वे चार्टर्ड प्लेन, प्राइवेट जेट और यहां तक कि क्रूज जैसी लग्जरी संपत्तियों के शौकीन बताए जाते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
माघ मेले में बाबा का शिविर सबसे बड़ा है और आधुनिक सुविधाओं से लैस है। भक्तों का कहना है कि बाबा के प्रवचन गहन होते हैं, लेकिन उनकी लग्जरी स्टाइल ने बहस छेड़ दी है। सतुआ बाबा ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि आध्यात्मिक लोग किसी भी साधन से यात्रा कर सकते हैं – चाहे ठेला हो, ऊंट हो या महंगी कार फोकस गंतव्य पर होना चाहिए।
