सोनभद्र में बनेगा प्रदेश का सबसे बड़ा डाटा सेंटर हब, 2030 तक 13 गीगावाट होगी देश की क्षमता
सोनभद्र। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डाटा सेंटरों की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश में बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए पहले चरण में सोनभद्र और मीरजापुर को चुना गया है। सोनभद्र में दो स्थानों पर 100-100 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।
जिले की ओबरा तहसील के कोटा और दुद्धी तहसील के आरंगपानी में डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए जमीन चिह्नित की गई है। फिलहाल दोनों स्थानों पर 100-100 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी है। भविष्य में जरूरत बढ़ने पर भूमि का दायरा 300 से 400 एकड़ तक किया जा सकता है।
2030 तक भारत में 13 गीगावाट डाटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दुनिया भर में डाटा सेंटरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर डाटा सेंटरों की कुल क्षमता करीब 124 गीगावाट बताई जा रही है, जिसे वर्ष 2030 तक 170 से 300 गीगावाट तक पहुंचाने की तैयारी है। भारत में फिलहाल करीब 1.7 गीगावाट क्षमता है और इसे 2030 तक 13 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर प्रदेश भी इस विस्तार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश में चार से पांच बड़े डाटा सेंटर समूह विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
AI के लिए विकसित होगा बड़ा डाटा हब
भविष्य में AI सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए बड़ी मात्रा में डाटा की जरूरत होगी। ऐसे में एक-दो डाटा सेंटरों के बजाय बड़े समूह विकसित करने की योजना है। इन केंद्रों में भारी मात्रा में डाटा का भंडारण, प्रसंस्करण और आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
प्रदेश के नियोजन विभाग की पहल पर बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप को परामर्शदाता के रूप में जोड़ा गया है। अब सोनभद्र में चिन्हित जमीन का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद जमीन की उपलब्धता के साथ बिजली, पानी, संपर्क व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया जाएगा।
बिजली-पानी और कनेक्टिविटी से मजबूत हुआ दावा
डाटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में जमीन के साथ लगातार बिजली आपूर्ति, पानी और बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। सोनभद्र में बड़े विद्युत उत्पादन केंद्र और औद्योगिक गतिविधियों का पहले से आधार मौजूद है। प्रस्तावित स्थानों से विंध्य एक्सप्रेसवे के गुजरने की भी बात कही गई है।
डाटा सेंटर स्थापित होने से क्षेत्र में सड़क, आवास, बाजार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावना है। इससे नए शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों के विकास को भी गति मिल सकती है।
एक बड़े केंद्र से 5 हजार युवाओं को रोजगार की उम्मीद
डाटा सेंटर परियोजनाओं से सूचना प्रौद्योगिकी, विद्युत, सुरक्षा, नेटवर्क संचालन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक बड़े डाटा सेंटर से करीब 5 हजार तक युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है। इसके अलावा परिवहन, खानपान, आवास, निर्माण और अन्य सेवाओं में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, AI और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए जिले में डाटा सेंटर स्थापित करने की पहल की गई है। कोटा और आरंगपानी में भूमि चिन्हित की जा चुकी है और जल्द ही शासन की टीम स्थलीय निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के बाद परियोजना की आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
