फंड की कमी के चलते सपा ने I-PAC से तोड़ा करार, अखिलेश बोले— पैसे हों तो दूसरी एजेंसी...
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) ने चुनावी रणनीति बनाने वाली पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के साथ अपना करार समाप्त कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ किया कि यह फैसला हाल के चुनावी नतीजों की वजह से नहीं, बल्कि फंड की कमी के कारण लिया गया है।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह लंबे समय तक महंगी चुनावी कंसल्टेंसी सेवाएं ले सके। उन्होंने बताया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए I-PAC को सीमित अवधि के लिए जोड़ा गया था, लेकिन आर्थिक कारणों से इसे जारी रखना संभव नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा, “हमने कुछ महीनों तक कंपनी के साथ काम किया, लेकिन अब हमारे पास उतना फंड नहीं है कि चुनावी रणनीति पर इतना खर्च कर सकें। अगर फंड मिले तो हम दूसरी कंपनियों को भी हायर कर सकते हैं।”
अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि I-PAC के साथ करार खत्म करने का फैसला पश्चिम बंगाल या तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनावी नतीजों से जुड़ा नहीं है। उन्होंने ऐसी अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया।
सपा प्रमुख ने चुनावी कंसल्टेंसी के मौजूदा इकोसिस्टम पर भी तंज कसते हुए कहा कि कई एजेंसियां चुनाव जिताने के दावे करती हैं। कुछ लोगों ने उन्हें सर्वे कराने, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और विरोधियों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेनिंग के लिए अलग-अलग कंपनियों को हायर करने की सलाह दी थी।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “सोच रहे हैं कि बड़ी कंपनियों से बात करें और उनसे कहें कि अगर हमारी सरकार बनवा देंगे तो सूचना विभाग का बड़ा हिस्सा उन्हें दे देंगे।”
गौरतलब है कि सपा ने I-PAC को बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देने, वोटर टर्नआउट बढ़ाने, डेटा एनालिसिस के जरिए रणनीति तैयार करने और विपक्ष की कमजोरियों पर काम करने की जिम्मेदारी दी थी।
I-PAC देश की प्रमुख चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनियों में शामिल है, जिसने भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस समेत कई दलों के लिए चुनावी अभियान मैनेज किए हैं। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी इससे जुड़े रहे हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम कर चुके हैं।
