प्रयागराज में STF का बड़ा एक्शन: ITI CBT परीक्षा में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, प्रिंसिपल समेत 11 गिरफ्तार
Lucknow : उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), नैनी में आयोजित अखिल भारतीय व्यावसायिक CBT परीक्षा में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। STF ने परीक्षा में असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाकर पास कराने के आरोप में संस्थान के प्रिंसिपल, परीक्षा प्रभारी, चार अनुदेशकों और पांच सॉल्वरों समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
STF के अनुसार, यह कार्रवाई 29 जुलाई 2026 को मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई। आरोप है कि गिरोह परीक्षार्थियों से पैसे लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाकर ऑनलाइन परीक्षा दिला रहा था।
11 जुलाई से चल रही थी परीक्षा
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि 11 जुलाई से 8 अगस्त 2026 तक चल रही अखिल भारतीय व्यावसायिक CBT परीक्षा के दौरान संस्थान में बड़े पैमाने पर सामूहिक नकल और सॉल्वर बैठाने का खेल चल रहा है। इसके बाद STF की प्रयागराज इकाई ने स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई कर कौशल विकास भवन में छापा मारा और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
प्रिंसिपल समेत ये लोग गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में पांच सॉल्वर, संस्थान के प्रिंसिपल अशोक कुमार, परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश, अनुदेशक फूल प्रकाश, धीरज कुमार शर्मा, राजेश कुमार और राजकुमार मौर्य शामिल हैं।
₹5.10 लाख नकद और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
कार्रवाई के दौरान STF ने आरोपियों के कब्जे से:
- ₹5.10 लाख नकद (परीक्षा पास कराने के नाम पर वसूली गई रकम)
- 5 मॉनिटर
- 5 CPU
- 5 कीबोर्ड
- 5 माउस
- 8 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
- परीक्षा से जुड़े 67 दस्तावेज
- 3 आधार कार्ड
- 3 पैन कार्ड
- 7 एटीएम कार्ड
- 1 पेन ड्राइव
- ₹16,370 अतिरिक्त नकद
बरामद किए हैं।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
STF के मुताबिक पूछताछ में परीक्षा प्रभारी रवि प्रकाश और अन्य आरोपियों ने स्वीकार किया कि पढ़ाई में कमजोर अभ्यर्थियों से प्रति परीक्षार्थी ₹4,000 लेकर उनकी जगह सॉल्वर बैठाए जाते थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद वसूली गई रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था।
जांच में सामने आया कि वर्तमान में बांदा ITI में तैनात अनुदेशक धीरंजन कुमार पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वही सॉल्वर उपलब्ध कराता था और संस्थान के कर्मचारियों के संपर्क में रहकर पूरी व्यवस्था संचालित करता था। STF उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।
सॉल्वरों को मिलते थे ₹500
गिरफ्तार सॉल्वरों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें प्रत्येक परीक्षा देने के बदले ₹500 दिए जाते थे। उन्हें मूल अभ्यर्थी का प्रवेश पत्र उपलब्ध कराया जाता था, जिसके आधार पर वे अलग कंप्यूटर लैब में बैठकर परीक्षा देते थे।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
सभी आरोपियों के खिलाफ थाना नैनी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2) तथा उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जांच स्थानीय पुलिस कर रही है।
