सिर्फ 2% आबादी, फिर भी 50 सीटों पर असर! 2027 में जाट वोट क्यों बनेंगे यूपी की बड़ी चुनावी कुंजी? समझिए पूरा खेल
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच पश्चिमी यूपी का जाट वोट बैंक एक बार फिर राजनीतिक दलों के लिए अहम हो गया है। प्रदेश की आबादी में जाट समुदाय की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी बताई जाती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर इसका प्रभाव काफी बड़ा है। यही वजह है कि BJP के नेतृत्व वाला NDA और SP-कांग्रेस गठबंधन, दोनों ही चुनाव से पहले जाट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकते हैं।
जाट समुदाय का बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। लंबे समय तक समुदाय का राजनीतिक झुकाव राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की ओर रहा, लेकिन पिछले कुछ चुनावों में BJP ने भी जाट मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। हालांकि, RLD आज भी समुदाय के बीच अपना महत्वपूर्ण आधार बनाए हुए है।
पश्चिमी यूपी की 50 सीटों पर जाट वोट क्यों अहम?
उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय की करीब 99 फीसदी आबादी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में रहती है। इन जिलों में 136 विधानसभा और 27 लोकसभा सीटें आती हैं। चुनावी जानकारों के मुताबिक, जाट समुदाय की आबादी भले ही सीमित हो, लेकिन करीब 35 से 40 विधानसभा सीटों पर उसका मजबूत प्रभाव है।
वहीं करीब 50 विधानसभा सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां जाट मतदाता चुनावी मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यानी कई सीटों पर जाट वोटों का रुख सीधे तौर पर जीत-हार के अंतर को प्रभावित कर सकता है।
इसी वजह से 2027 के विधानसभा चुनाव में BJP-RLD गठबंधन के साथ-साथ SP-कांग्रेस गठबंधन की नजर भी इस वोट बैंक पर रहने की संभावना है।
2007 में RLD को मिला था सबसे ज्यादा जाट समर्थन
जाट मतदाताओं के चुनावी रुझान को देखें तो 2007 के विधानसभा चुनाव में RLD को समुदाय का बड़ा समर्थन मिला था। लोकनीति-CSDS के विश्लेषण के मुताबिक, उस चुनाव में करीब 61 फीसदी जाट मतदाताओं ने RLD को वोट दिया था।
वहीं BJP+ को करीब 18 फीसदी जाट वोट मिले थे। BSP को 10 फीसदी, SP को 8 फीसदी और कांग्रेस को करीब 2 फीसदी जाट वोट मिले। उस चुनाव में मायावती की अगुवाई वाली BSP ने प्रदेश में सरकार बनाई थी।
2012 में RLD का आधार घटा, दूसरे दलों को फायदा
2012 के विधानसभा चुनाव में भी RLD जाट वोटों के मामले में सबसे आगे रही, लेकिन उसका समर्थन 2007 के मुकाबले कम हो गया। लोकनीति-CSDS के मुताबिक, इस चुनाव में RLD को करीब 45 फीसदी जाट वोट मिले।
BSP ने जाट वोट बैंक में सेंध लगाते हुए करीब 16 फीसदी वोट हासिल किए। कांग्रेस को 11 फीसदी, जबकि BJP और SP को करीब 7-7 फीसदी जाट वोट मिले। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में RLD और कांग्रेस के बीच गठबंधन था।
2017 में BJP ने बदला पश्चिमी यूपी का समीकरण
2017 का विधानसभा चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लेकर आया। BJP ने प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 300 से अधिक सीटों पर जीत हासिल की। पार्टी ने जाट मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत की, जबकि RLD का प्रभाव काफी कमजोर हुआ। RLD उस चुनाव में सिर्फ एक सीट जीत सकी और उसका कुल वोट शेयर करीब 1.80 फीसदी रहा।
दूसरी ओर, BJP ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों की 126 विधानसभा सीटों में से करीब 100 सीटों पर जीत दर्ज की। इससे साफ हुआ कि पश्चिमी यूपी के जाट बहुल इलाकों में BJP ने अपनी राजनीतिक जमीन काफी मजबूत कर ली है।
2022 में SP-RLD गठबंधन ने BJP को दिया झटका
2022 के विधानसभा चुनाव में RLD ने SP के साथ गठबंधन किया। कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन के बाद माना जा रहा था कि पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं की नाराजगी BJP को नुकसान पहुंचा सकती है।
हालांकि, तस्वीर पूरी तरह वैसी नहीं रही। BJP ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 85 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि SP-RLD गठबंधन के खाते में 41 सीटें आईं। RLD ने इस चुनाव में आठ सीटें जीतीं।
फिर भी कई जाट बहुल इलाकों में BJP को बड़ा झटका लगा। पार्टी शामली की तीनों विधानसभा सीटें हार गई। मेरठ की सात में से चार सीटें और मुजफ्फरनगर की छह में से चार सीटें भी BJP के हाथ से निकल गईं। इसके अलावा मुरादाबाद की सभी छह सीटों पर BJP को हार मिली। रामपुर और संभल की कुल चार सीटों में से तीन पर भी पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा।
2027 में BJP के सामने जाट वोटों की नई चुनौती
2027 के चुनाव को देखते हुए BJP पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं कर सकती। पार्टी ने अगस्त 2022 में जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी। हालांकि दिसंबर 2025 में संगठनात्मक फेरबदल के दौरान उनकी जगह पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
दूसरी ओर जयंत चौधरी की अगुवाई वाली RLD अब NDA का हिस्सा है। ऐसे में BJP के पास पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय तक पहुंच बनाने के लिए RLD के रूप में एक महत्वपूर्ण सहयोगी मौजूद है।
2022 में जाट वोटों का बड़ा हिस्सा SP-RLD गठबंधन के साथ गया था। ऐसे में BJP के लिए इस वोट बैंक को फिर से मजबूत करना 2027 की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
जयंत चौधरी से लेकर चौधरी चरण सिंह तक, BJP का दांव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जयंत चौधरी की RLD के साथ गठबंधन BJP को पश्चिमी यूपी के जाट मतदाताओं तक पहुंचने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पार्टी अपने संगठन और टिकट वितरण में भी जाट समुदाय को प्रतिनिधित्व देने पर ध्यान दे सकती है। संजीव बालियान और सत्यपाल सिंह जैसे जाट नेताओं की भूमिका भी समुदाय के बीच BJP के समर्थन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसके साथ ही BJP ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री और प्रमुख जाट नेता चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया था। इसे पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय के बीच राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा गया।
2027 के लिए BJP ने शुरू की तैयारी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर BJP ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। लखनऊ में पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में हाल ही में BJP के कोर ग्रुप की अहम बैठक हुई, जिसमें चुनावी तैयारियों के साथ संगठन और सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
ऐसे में 2027 की लड़ाई में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जाट वोट बैंक एक बार फिर महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आ सकता है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि जाट मतदाता किस पार्टी के साथ जाएंगे, बल्कि असली सवाल यह है कि क्या करीब 2 फीसदी आबादी वाला यह समुदाय 35-40 सीटों पर सीधा असर और करीब 50 सीटों पर चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता के साथ 2027 में सत्ता की राह तय करेगा?
