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यूपी में सरकारी योजनाओं के पैसे के लिए बदल सकता है नियम, आधार की जगह वोटर ID और बायोमेट्रिक से होगी पहचान?

यूपी में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए पहचान और भुगतान का नियम बदल सकता है। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने आधार की जगह वोटर आईडी के EPIC नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन का संकेत दिया है। जानिए पीएम किसान, पेंशन और आवास योजना पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

 
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उत्तर प्रदेश समेत देशभर में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के लिए पहचान और भुगतान की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। अब तक कई सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और उनके बैंक खातों में पैसा भेजने के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के एक बयान के बाद इस व्यवस्था में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, भविष्य में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी के EPIC नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में कोई विस्तृत सरकारी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। ऐसे में लाभार्थियों को फिलहाल अपने मौजूदा दस्तावेजों और ई-केवाईसी प्रक्रिया में बदलाव करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान करने का आधार अब केवल आधार कार्ड नहीं रहेगा। इसके बजाय लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक जानकारी और वोटर आईडी कार्ड पर दर्ज EPIC नंबर का इस्तेमाल किया जाएगा।

मंत्री के इस बयान के बाद सरकारी योजनाओं में आधार आधारित पहचान और भुगतान व्यवस्था के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई व्यवस्था किन-किन योजनाओं पर लागू होगी और इसे कब से शुरू किया जाएगा। 


क्या होता है EPIC नंबर?

EPIC का पूरा नाम Electors Photo Identity Card है। यह मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड पर दर्ज एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

प्रस्तावित व्यवस्था में लाभार्थियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए वोटर आईडी का EPIC नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन देना पड़ सकता है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में लाभार्थियों की पहचान की पुष्टि करने और फर्जी या दोहरे लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

यूपी की इन सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर

अगर केंद्र सरकार इस संभावित व्यवस्था को लागू करती है, तो उत्तर प्रदेश में भी कई सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इन योजनाओं पर विशेष नजर रहेगी:

1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि: किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): ग्रामीण परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए आर्थिक मदद मिलती है।
3. वृद्धावस्था पेंशन: पात्र बुजुर्गों को नियमित आर्थिक सहायता दी जाती है।
4. विधवा पेंशन: पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता मिलती है।
5. दिव्यांग पेंशन: पात्र दिव्यांगजनों को पेंशन का लाभ मिलता है।
6. ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना: ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना।

इनमें से कई योजनाओं में आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाता है। हालांकि, अभी यह पुष्टि नहीं हुई है कि प्रस्तावित EPIC-बायोमेट्रिक व्यवस्था इन सभी योजनाओं में लागू होगी। 


 

मंत्री के बयान के बाद लाभार्थियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब आधार कार्ड की जरूरत खत्म होने वाली है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत अधिसूचना जारी नहीं की गई है। न ही यह स्पष्ट किया गया है कि नई व्यवस्था सभी सरकारी योजनाओं पर लागू होगी या केवल पंचायत राज और कुछ चुनिंदा योजनाओं तक सीमित रहेगी।

इसलिए फिलहाल आधार कार्ड से भुगतान की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त मानना सही नहीं होगा। 

लाभार्थी अभी क्या करें?

उत्तर प्रदेश में पीएम किसान, पेंशन, आवास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
- अपना आधार कार्ड सुरक्षित रखें।
- बैंक खाते की जानकारी और आधार लिंकिंग की स्थिति जांचते रहें।
- संबंधित योजना की मौजूदा ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी रखें।
- वोटर आईडी और EPIC नंबर भी सुरक्षित रखें।
- किसी अनजान व्यक्ति को दस्तावेज या बायोमेट्रिक जानकारी न दें।
नई व्यवस्था लागू होने पर सरकार की ओर से आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उसके बाद ही स्पष्ट होगा कि किन लाभार्थियों को नए तरीके से पहचान सत्यापन कराना होगा।

फर्जी लाभार्थियों पर लगाम लगाने की कोशिश

सरकारी योजनाओं में फर्जी और दोहरे लाभार्थियों की पहचान करना हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। बायोमेट्रिक सत्यापन और EPIC नंबर को शामिल करने का उद्देश्य लाभार्थियों की पहचान को अधिक विश्वसनीय बनाना और सरकारी सहायता को सही व्यक्ति तक पहुंचाना बताया जा रहा है।

अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को किस रूप में लागू करती है और उत्तर प्रदेश की किन योजनाओं को इसके दायरे में शामिल किया जाता है।