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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यूपी में पेपर लीक की सियासत तेज, बेदी राम-विपुल दुबे के पुराने पेपर लीक केस खोलने की मांग

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश में पेपर लीक का मुद्दा फिर गरमा गया है। आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुभासपा विधायक बेदी राम और निषाद पार्टी विधायक विपुल दुबे से जुड़े पुराने मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।

 
धर्मेंद्र प्रधान
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लखनऊ: केंद्र में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पेपर लीक का मुद्दा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी तेजी से उभरने लगा है। इसी बीच आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुभासपा विधायक बेदी राम और निषाद पार्टी विधायक विपुल दुबे से जुड़े पुराने पेपर लीक मामलों में निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है। इस पत्र के सामने आने के बाद प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री को भेजा पत्र, पुराने मामलों की समीक्षा की मांग

अमिताभ ठाकुर ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि हाल के पेपर लीक मामलों के कारण पूरे देश में युवाओं के बीच गहरा आक्रोश है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की बात कर रही हैं, ऐसे में वर्षों से लंबित पुराने मामलों को भी उसी गंभीरता से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार परीक्षा माफिया के खिलाफ सख्त संदेश देना चाहती है तो पुराने मामलों में भी निष्पक्ष और तेज कार्रवाई जरूरी है।

2006 रेलवे भर्ती पेपर लीक केस का किया जिक्र

अपने पत्र में अमिताभ ठाकुर ने वर्ष 2006 के रेलवे भर्ती परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले का उल्लेख किया है, जिसकी सुनवाई लखनऊ की अदालत में चल रही है। उनके अनुसार इस मामले में सुभासपा विधायक बेदी राम, निषाद पार्टी विधायक विपुल दुबे सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन अभी भी लंबित है।

उन्होंने यह भी कहा कि बेदी राम के खिलाफ प्रश्नपत्र लीक से जुड़े अन्य आपराधिक मामले भी विभिन्न स्तरों पर लंबित बताए जाते हैं।

सरकार से क्या-क्या मांग की गई?

अमिताभ ठाकुर ने पत्र में राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों की वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर नियमित समीक्षा कराई जाए। साथ ही सक्षम लोक अभियोजकों के माध्यम से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए और पूरी न्यायिक प्रक्रिया की लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। उनका कहना है कि कानून के मुताबिक समयबद्ध तरीके से कार्रवाई होने से युवाओं का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

'जीरो टॉलरेंस' नीति पर उठाए सवाल

पत्र में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू करना चाहती है, तो केवल नए मामलों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। वर्षों से लंबित पुराने मामलों को भी समान प्राथमिकता देकर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीति का असर तभी दिखाई देगा, जब पुराने मामलों में भी प्रभावी अभियोजन और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद तेज हुई सियासी चर्चा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देशभर में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक को लेकर बहस तेज हो गई है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश में सहयोगी दलों के विधायकों से जुड़े पुराने मामलों को लेकर उठी यह मांग राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार इन लंबित मामलों की समीक्षा कर कार्रवाई तेज करने के लिए कोई नया निर्देश जारी करती है या नहीं।