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स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर UPPCL को झटका, 7.18 लाख का जुर्माना; उपभोक्ताओं के पक्ष में आयोग का बड़ा फैसला
 

 
 स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर UPPCL को झटका, 7.18 लाख का जुर्माना; उपभोक्ताओं के पक्ष में आयोग का बड़ा फैसला
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। उपभोक्ताओं की शिकायतों और व्यापक अव्यवस्था के बाद उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई स्मार्ट मीटर रिचार्ज कराने के बावजूद निर्धारित समय के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल न करने की गंभीर लापरवाही के मामले में की है।

आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को समय पर सेवा देने में विफल रहा। नियमों के अनुसार स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए, लेकिन लाखों उपभोक्ताओं को घंटों और कई मामलों में दिनों तक इंतजार करना पड़ा।

मार्च-अप्रैल में मचा था हाहाकार

मार्च 2026 में बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिया था। बैलेंस समाप्त होते ही प्रदेशभर के करीब पांच लाख घरों की बिजली एक साथ काट दी गई। उपभोक्ताओं ने तत्काल रिचार्ज कराया, लेकिन कई इलाकों में बिजली बहाल होने में 15 दिन तक लग गए। इसको लेकर प्रदेशभर में भारी विरोध और आक्रोश देखने को मिला था।

उपभोक्ता परिषद की याचिका पर हुई कार्रवाई

इस मामले को लेकर उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने UPERC में याचिका दाखिल की थी। परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग ने UPERC (स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस) रेगुलेशन-2019 का उल्लंघन किया है। सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि बिजली कंपनियों ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर संचालन में गंभीर लापरवाही बरती है।

40 लाख से अधिक उपभोक्ता हुए प्रभावित

आयोग के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 13 मार्च से 10 अप्रैल के बीच कुल 40,27,307 उपभोक्ताओं की बिजली काटी गई। इनमें से 18,78,385 उपभोक्ताओं की बिजली आधे घंटे के भीतर बहाल हो गई, जबकि 22,21,036 उपभोक्ताओं को दो घंटे के भीतर आपूर्ति मिल गई। हालांकि 1,93,143 उपभोक्ताओं को दो घंटे से लेकर कई दिनों तक बिजली नहीं मिल सकी, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

जुर्माने के साथ मांगा जवाब

आयोग ने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 142 और 57 के तहत प्रति उल्लंघन एक लाख रुपये तथा देरी के प्रत्येक दिन के लिए 6,000 रुपये के हिसाब से कुल 7 लाख 18 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही UPPCL के प्रबंध निदेशक से 15 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया गया है।

तकनीकी खामियों की जांच के निर्देश

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला स्मार्ट मीटर प्रणाली में मौजूद तकनीकी खामियों और निगरानी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। आयोग ने बिजली विभाग को "रूट कॉज एनालिसिस" कर समस्या की वास्तविक वजह पता लगाने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के रिचार्ज के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत बहाल होनी चाहिए। दो घंटे से अधिक समय तक बिजली न जुड़ना यह दर्शाता है कि विभाग तकनीकी गड़बड़ियों की समय पर पहचान और समाधान करने में असफल रहा है।