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योगी कैबिनेट विस्तार 2026: सपा से बगावत करने वालों को मिलेगा इनाम? मंत्री पद की दौड़ में कई बड़े नाम

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को हो सकता है। चुनाव से पहले भाजपा जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की तैयारी में है। सपा से बगावत करने वाले विधायकों समेत कई बड़े नेताओं के मंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है।

 
योगी कैबिनेट विस्तार 2026
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Yogi Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा इस विस्तार के जरिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि इस बार छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा राज्यमंत्रियों को प्रमोशन देकर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।

सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं की हो रही है जिन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से बगावत कर भाजपा का समर्थन किया था। रायबरेली से विधायक मनोज पांडेय और कौशांबी से विधायक पूजा पाल को मंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सपा से बगावत का मिल सकता है बड़ा इनाम

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा राज्यसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में वोट करने वाले नेताओं को अब बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। मनोज पांडेय पहले भी सपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं और लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वहीं पूजा पाल को भी दलित और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा

मंत्रिमंडल विस्तार में जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, वाराणसी से विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, फतेहपुर की विधायक कृष्णा पासवान और अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेंद्र दिलेर शामिल हैं। इसके अलावा भाजपा प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ऊर्जा मंत्री रहे श्रीकांत शर्मा की वापसी की भी चर्चा तेज है।

कई राज्यमंत्रियों को मिल सकता है प्रमोशन

सूत्रों के मुताबिक सरकार कुछ राज्यमंत्रियों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे सकती है। जिन नामों पर चर्चा है उनमें जेपीएस राठौर, गुलाब देवी, दिनेश प्रताप सिंह और असीम अरुण शामिल हैं। भाजपा इस फैसले के जरिए पिछड़ा, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश में है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें

शनिवार को पश्चिम बंगाल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से लौटने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की। इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही अटकलों को और बल मिल गया। बताया जा रहा है कि रविवार दोपहर तीन बजे शपथ ग्रहण कार्यक्रम हो सकता है।

जातीय समीकरण साधने पर भाजपा का फोकस

भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए हर वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। वर्तमान में भाजपा के 258 विधायकों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी ओबीसी वर्ग की है। इसके अलावा राजपूत, ब्राह्मण, दलित और वैश्य नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ मंत्री बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों की नींव भी तय करेगा।

दो साल पहले हुआ था पहला विस्तार

योगी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार मार्च 2024 में हुआ था। उस दौरान ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील शर्मा को कैबिनेट में शामिल किया गया था। भाजपा ने तब भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी थी।

अब दूसरा विस्तार उससे भी ज्यादा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व दोनों की दिशा इसी से तय होती दिख रही है।