जनस्वास्थ्य में क्रांति: 7 साल में आयुष्मान भारत ने कैसे बदली करोड़ों की जिंदगी
Ayushman Bharat Yojana: देश की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) ने कुछ ही दिन पहले 24 सितंबर को अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। 2018 में शुरू हुई इस योजना ने गरीब और वंचित परिवारों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा देकर भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का चेहरा बदल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “जनस्वास्थ्य में क्रांति” बताया और कहा कि इस योजना ने करोड़ों परिवारों की गरिमा और आर्थिक स्थिरता दोनों की रक्षा की है। लोगों को कुछ शिकायतें भी हैं जैसे इस कार्ड को बनवाना कैसे है या कहां से बनेगा लोगों को अभी तक इसकी पूरी जानकारी नहीं है। पर कुल मिलाकर इस योजना ने करोड़ों परिवारों को लाभ दिया है, और कइयों कि जिंदगी भी बचाई है। आइये जानते हैं 7 साल में क्या बदला और इस योजना की उपलब्धियां..
7 साल में क्या बदला?
- इस योजना के तहत अब तक लाखों मरीजों को मुफ्त इलाज मिल चुका है।
- 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को गंभीर बीमारियों में बड़ी राहत मिली है।
- गरीब परिवारों पर गंभीर बीमारियों का आर्थिक बोझ कम हुआ।
- सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में मरीजों के लिए इलाज की समान पहुंच बनी।
UP बना नंबर-1 राज्य
- Ayushman Bharat Yojana में उत्तर प्रदेश पूरे देश में सबसे आगे है।
- राज्य में अब तक 9 करोड़ पात्र लोगों में से 5.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं।
- यानी 87% परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड तैयार हो चुका है।
- योजना की CEO अर्चना वर्मा ने बताया कि योगी सरकार ने हाल ही में शिक्षकों और कई अन्य श्रेणियों को भी इसमें शामिल किया है।
मुफ्त इलाज की बड़ी सुविधा
- यूपी में अब तक 74.40 लाख मरीजों ने इस योजना के तहत मुफ्त इलाज पाया है।
- सरकार ने इस पर 12,283 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
- राज्य में 6,099 अस्पताल (2,921 सरकारी और 3,088 निजी) योजना से जुड़े हैं, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।
- कैंसर, हृदय रोग, ऑर्थोपेडिक, अंग प्रत्यारोपण, शिशु कैंसर, प्लास्टिक सर्जरी और कई गंभीर बीमारियों का इलाज मुफ्त में उपलब्ध है।
केंद्र और राज्य की साझेदारी
इस योजना की सफलता में केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी अहम रही। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अस्पतालों की संख्या बढ़ाई गई, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती हुई और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया गया।
अब भी कई चुनौतियां बाकी
- कई इलाकों में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।
- महंगी और दुर्लभ बीमारियों को योजना में शामिल करने की जरूरत है।
- पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत बनाने पर जोर है।
कैसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड?
योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmjay.gov.in पर जाकर अपनी पात्रता जांच सकते हैं।
पात्रता साबित होने पर आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या नजदीकी CSC सेंटर से भी कार्ड बनवा सकते हैं।
पीएम मोदी का संदेश
कार्यक्रम के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा –
"आयुष्मान भारत ने साबित कर दिया है कि पैमाने, संवेदना और तकनीक का सही मेल लोगों की जिंदगी बदल सकता है। यह योजना हर गरीब परिवार की आखिरी उम्मीद है और आने वाले सालों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनेगी।"
आयुष्मान भारत योजना ने सात साल में यह दिखा दिया कि अगर सरकार सही दिशा और नीयत के साथ काम करे तो गरीब और वंचित वर्ग को भी उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त में दी जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश की सफलता इस योजना का सबसे बड़ा उदाहरण है। आने वाले सालों में यह योजना भारत की जनस्वास्थ्य क्रांति का आधार बन सकती है।
FAQs-
सितंबर 2018 को रांची से शुरुआत।
हर परिवार को ₹5 लाख का सलाना स्वास्थ्य कवर।
10.3 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती और ₹1.48 लाख करोड़ का इलाज।
12 करोड़ परिवार, आशा/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 70+ सीनियर सिटिजेन शामिल।
1.8 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर ऑपरेटेड।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स भी योजना में शामिल।
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